छत्तीसगढ़

सफाई, पानी और स्ट्रीट लाइट की बदहाल व्यवस्था से पार्षदों में आक्रोश! भाजपा-कांग्रेस पार्षदों ने जोन कमिश्नरी में जड़ा ताला

रायपुर। राजधानी रायपुर में सफाई व्यवस्था, पेयजल संकट, स्ट्रीट लाइट और डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन की बदहाल स्थिति अब जनप्रतिनिधियों के आक्रोश का कारण बनती जा रही है। वार्डों में लगातार मिल रही शिकायतों और समस्याओं का समाधान नहीं होने से नाराज भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के पार्षदों ने एकजुट होकर जोन कमिश्नर कार्यालय के मुख्य द्वार पर ताला जड़ दिया। सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक चले इस विरोध प्रदर्शन ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पार्षदों का आरोप है कि वार्डों में कचरा नियमित रूप से नहीं उठ रहा है। कई इलाकों में पेयजल की समस्या बनी हुई है, तो कहीं स्ट्रीट लाइट बंद होने से लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन की गाड़ियां भी नियमित रूप से नहीं पहुंच रही हैं। इन समस्याओं को लेकर कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
आखिर जनता की शिकायतों पर अधिकारी क्यों नहीं दे रहे ध्यान?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब वार्डों की समस्याओं को लेकर पार्षद लगातार अधिकारियों के सामने अपनी बात रख रहे हैं, तो समाधान क्यों नहीं निकल रहा? क्या नगर निगम के अधिकारियों की जवाबदेही केवल कागजों तक सीमित रह गई है? क्या सफाई, पेयजल और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भी जनप्रतिनिधियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा?

महापौर ने भी अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

 महापौर मीनल चौबे ने भी अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि अधिकारी काम नहीं करना चाहते। आम नागरिकों की समस्याओं और जनप्रतिनिधियों की शिकायतों को भी गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर नगर निगम की व्यवस्था किसके भरोसे संचालित हो रही है?


भाजपा-कांग्रेस पार्षद एक मंच पर, अधिकारियों के खिलाफ जताया आक्रोश
इस विरोध प्रदर्शन में भाजपा और कांग्रेस के पार्षदों ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर वार्डों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। पार्षदों का कहना है कि जनता ने उन्हें समस्याओं के समाधान के लिए चुना है, लेकिन जब अधिकारी ही उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं देंगे तो जनता को जवाब कौन देगा?
आयुक्त के आश्वासन के बाद खुला ताला, लेकिन समाधान का इंतजार
विरोध प्रदर्शन के दौरान नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा के आश्वासन के बाद पार्षदों ने ताला खोला। हालांकि, अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अधिकारियों के आश्वासन के बाद वार्डों की समस्याओं का वास्तव में समाधान होगा या फिर कुछ दिनों बाद हालात पहले जैसे ही हो जाएंगे?
अमन प्रकाश न्यूज़ का सवाल: राजधानी के वार्डों में सफाई, पेयजल और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना नगर निगम की जिम्मेदारी है। जब भाजपा और कांग्रेस के पार्षदों को अपनी मांगों के लिए जोन कार्यालय में ताला लगाना पड़ रहा है, तो आम जनता की शिकायतों का क्या हाल होगा?
जनता को आश्वासन नहीं, धरातल पर काम चाहिए। अब देखना यह है कि नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी कब तक इन समस्याओं का स्थायी समाधान करते हैं।

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