2 करोड़ के 174 आईफोन चोरी… आखिर पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल क्यों?

रायपुर में एप्पल के अधिकृत डीलर के शोरूम का शटर तोड़कर करीब 2 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत के 174 आईफोन सहित अन्य उपकरण चोरी होने की खबर ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शहर के एसआरपी चौक और मरीन ड्राइव के बीच मुख्य मार्ग पर स्थित शोरूम में चोरों ने रात के समय वारदात को अंजाम दिया। खबर के मुताबिक चोर शटर के बीच सेंटर लॉक नहीं होने का फायदा उठाकर अंदर दाखिल हुए और बड़ी संख्या में मोबाइल फोन लेकर फरार हो गए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस इलाके में रात के समय भी आवाजाही रहती है, वहां इतनी बड़ी चोरी की वारदात आखिर कैसे हो गई?
क्या उस क्षेत्र में रात की पुलिस गश्त पर्याप्त थी?
क्या मुख्य मार्ग और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की नियमित निगरानी की जा रही थी?
और अगर चोर रात 2 से 3 बजे के बीच वारदात को अंजाम देकर फरार हुए, तो पुलिस को इसकी जानकारी सुबह करीब साढ़े 9 बजे क्यों मिली?
खबर में यह भी सामने आया है कि पुलिस प्रोफेशनल गैंग की भूमिका की आशंका के आधार पर जांच कर रही है और दूसरे शहरों में भी पुलिस को अलर्ट किया गया है।
लेकिन सवाल सिर्फ चोरी के बाद जांच का नहीं है।
सवाल यह भी है कि राजधानी में करोड़ों रुपये के मोबाइल वाले बड़े शोरूम और संवेदनशील व्यावसायिक इलाकों की रात में सुरक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी है?
क्या रात की पेट्रोलिंग और नाइट गश्त की व्यवस्था की समीक्षा होगी?
क्या पुलिस यह पता लगाएगी कि वारदात के समय आसपास के कैमरे काम कर रहे थे या नहीं?
और सबसे महत्वपूर्ण—अगर यह पेशेवर गिरोह है, तो क्या ऐसे गिरोहों की गतिविधियों पर पहले से निगरानी थी?
फिलहाल पुलिस जांच में जुटी है और चोरी गए मोबाइल की बरामदगी तथा आरोपियों तक पहुंचना जांच का विषय है।
लेकिन इस बड़ी चोरी ने राजधानी की रात की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
अमन प्रकाश न्यूज़ का सवाल—करोड़ों की चोरी के बाद कार्रवाई तो होगी, लेकिन क्या ऐसी वारदात रोकने के लिए पुलिस की नाइट पेट्रोलिंग और निगरानी व्यवस्था की भी समीक्षा होगी?



