शहर की 66 हजार स्ट्रीट लाइट, जिम्मेदारी सिर्फ 90 लोगों पर क्यों?
दीपावली से पहले स्ट्रीट लाइट व्यवस्था सुधारने के निर्देश, फिर भी सवालों के घेरे में नगर निगम की तैयारी?

एम. डी. आरिफ की रिपोर्ट…
रायपुर शहर में करीब 66 हजार 900 स्ट्रीट लाइट होने की बात सामने आई है। दीपावली से महज पांच दिन पहले नगर निगम की बैठक में सभी जोन कमिश्नरों को स्ट्रीट लाइट व्यवस्था दुरुस्त करने और कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए गए। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी व्यवस्था की निगरानी और सुधार की जिम्मेदारी महज 90 लोगों के भरोसे क्यों?
क्या नगर निगम के पास स्ट्रीट लाइट के रखरखाव के लिए पर्याप्त मानव संसाधन नहीं है?
जब सभी 10 जोनों को स्ट्रीट लाइट उपलब्ध कराई जा चुकी हैं, तो कई इलाकों में इन्हें लगाने का काम अपेक्षित गति से क्यों नहीं हो पा रहा है?
दीपावली के लिए 1978 स्ट्रीट लाइट उपलब्ध कराए जाने के बावजूद क्या शहर के सभी वार्डों और प्रमुख मार्गों में समय पर रोशनी सुनिश्चित हो पाएगी?
मैदानों में प्रकाश व्यवस्था के लिए 589.91 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे, लेकिन बताया गया कि चार मैदानों में ही हाईमास्ट लाइट लग पाई। आखिर बाकी मैदानों में प्रकाश व्यवस्था क्यों नहीं हो सकी?

सबसे बड़ा सवाल—जब शहर में स्ट्रीट लाइट की संख्या लगातार बढ़ रही है, तो उसके अनुरूप कर्मचारियों और निगरानी व्यवस्था को मजबूत क्यों नहीं किया गया?
क्या कर्मचारियों की कमी वास्तव में स्ट्रीट लाइट व्यवस्था में देरी का कारण है, या फिर व्यवस्था की मॉनिटरिंग में ही कहीं बड़ी कमी रह गई है?
दीपावली के मौके पर शहर रोशन होगा या फिर कई वार्डों की गलियां अंधेरे में ही रह जाएंगी?
आने वाले अंकों में वार्ड और चौक-चौराहे के अनुसार स्ट्रीट लाइट व्यवस्था की हकीकत सामने रखी जाएगी।




