छत्तीसगढ़

5. सुगंधित चावल प्रजाति नगरी दुबराज को मिला GI टैग, किसानों को मिलेगा व्यापारीकरण का विशेषाधिकार

रायपुर। प्रदेश में बासमती के नाम से प्रसिद्ध ‘‘नगरी दुबराज’’ चावल को भारत सरकार के बौद्धिक संपदा अधिकार प्राधिकरण द्वारा भौगोलिक उपदर्शन अधिकार (जीआई टैग) प्रदान किया गया है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के मागर्दर्शन में कार्यरत ग्राम बगरूमनाला, नगरी जिला धमतरी के नगरी दुबराज उत्पादक महिला स्व-सहायता समूह ‘‘मां दुर्गा स्वयं सहायता समूह’’ को नगरी दुबराज के लिए जीआइ टैग दिया गया। जीआइ टैग मिलने से अन्तर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर इसके निर्यात की मांग बढ़ जाएगी, जिससे नगरी के किसानों को इस चावल के व्यापारीकरण का विशेषाधिकार मिल जाएगा।

गौरतलब है कि जीआइ टैग एक प्रकार का बौद्धिक संपदा अधिकार होता है, जिसमें किसी भी उत्पाद की गुणवत्ता एवं महत्ता उस स्थान विशेष के भौगोलिक वातावरण से निर्धारित की जाती है। इसमें उस उत्पाद के उत्पत्ति स्थान को मान्यता प्रदान की जाती है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डा. गिरीश चंदेल ने नगरी दुबराज को जीआइ टैग मिलने पर कृषक उत्पादक समूह को बधाई दी हैं। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रयासों से वर्ष 2019 में सरगुजा जिले के ‘‘जीराफूल’’ चावल के पश्चात अब दुबराज चावल को जीआइ टैग मिलना एक बड़ी उपलब्धि है।

 

सुगंधित धान प्रजाति है

बासमती के रूप में विख्यात नगरी दुबराज चावल राज्य की पारंपरिक, सुगंधित धान प्रजाति है, जिसकी प्रदेश के बाहर भी काफी मांग है। नगरी दुबराज का उत्पत्ति स्थल सिहावा के श्रृंगी ऋषि आश्रम क्षेत्र को माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रृंगी ऋषि आश्रम का संबंध राजा दशरथ द्वारा संतान प्राप्ति के लिए आयोजित पुत्रेष्ठि यज्ञ तथा भगवान राम के जन्म से जुड़ा हुआ है। विभिन्न शोध पत्रों में दुबराज चावल का उत्पत्ति स्थल नगरी सिहावा को ही बताया गया है।

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