छत्तीसगढ़

2. निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम, सरकार ने जारी किए सख्त निर्देश

छत्तीसगढ़ में निजी स्कूलों द्वारा की जा रही अनियमितताओं को रोकने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अब सभी प्राइवेट स्कूलों को निर्धारित नियमों और गाइडलाइन का पालन करना अनिवार्य होगा। इस पूरे मामले की निगरानी जिला कलेक्टरों द्वारा की जाएगी।

सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि यदि किसी स्कूल द्वारा नियमों की अनदेखी की जाती है, तो उसके खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

SCERT और NCERT किताबों को प्राथमिकता

जारी निर्देशों के अनुसार, छत्तीसगढ़ बोर्ड से जुड़े निजी स्कूलों में कक्षा 1 से 10वीं तक केवल SCERT द्वारा प्रकाशित किताबों से ही पढ़ाई कराई जाएगी। इन किताबों को राज्य पाठ्य पुस्तक निगम के माध्यम से छात्रों को नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाता है।

वहीं, CBSE से संबद्ध स्कूलों के लिए NCERT पाठ्यक्रम को अनिवार्य किया गया है। सरकार को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई स्कूल अभिभावकों को महंगी निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए बाध्य करते हैं, जिस पर अब रोक लगाने का फैसला लिया गया है।

अभिभावकों पर अतिरिक्त बोझ रोकने की पहल

सरकार का मानना है कि शिक्षा का उद्देश्य सभी वर्गों तक सुलभ और किफायती शिक्षा पहुंचाना है। खासतौर पर कक्षा 1 से 8वीं तक शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू है, जिसके तहत छात्रों को बिना आर्थिक बोझ के पढ़ाई का अधिकार मिलता है।

इसी को ध्यान में रखते हुए निर्देश दिया गया है कि इन कक्षाओं में केवल NCERT की किताबें ही लागू की जाएं और निजी प्रकाशनों की किताबें थोपने से बचा जाए।

यूनिफॉर्म और स्टेशनरी में नहीं होगी बाध्यता

सरकार ने एक और अहम फैसला लेते हुए स्पष्ट किया है कि कोई भी स्कूल अभिभावकों को किसी एक तय दुकान से यूनिफॉर्म या स्टेशनरी खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।

अक्सर शिकायतें सामने आती थीं कि स्कूल प्रबंधन अपनी पसंदीदा दुकानों से ही सामान खरीदने का दबाव बनाते हैं, जिससे अभिभावकों को महंगे दाम चुकाने पड़ते हैं। अब इस तरह की प्रथाओं पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।

शिकायतों के समाधान के लिए व्यवस्था जरूरी

स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी निजी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे शिकायतों के निपटारे के लिए एक स्पष्ट और पारदर्शी व्यवस्था तैयार करें। अभिभावकों और छात्रों की समस्याओं का समय पर समाधान करना अब स्कूलों की जिम्मेदारी होगी।

नियमों के उल्लंघन पर होगी कार्रवाई

सरकार ने चेतावनी दी है कि जो स्कूल इन निर्देशों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि सभी स्कूल नियमों का पालन करें।

उच्च अधिकारियों को भेजी गई सूचना

इस आदेश की जानकारी राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों, मुख्यमंत्री कार्यालय, स्कूल शिक्षा मंत्री के कार्यालय और शिक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारियों को भी भेजी गई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार इस मुद्दे को लेकर गंभीर है और किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगी।

अभिभावकों को मिलेगा सीधा लाभ

सरकार के इस फैसले से सबसे बड़ा फायदा अभिभावकों को मिलने की उम्मीद है। किताबों, यूनिफॉर्म और स्टेशनरी पर होने वाले अनावश्यक खर्च में कमी आएगी और शिक्षा अधिक किफायती बन सकेगी। अब यह देखना होगा कि इन निर्देशों का जमीनी स्तर पर कितना प्रभाव पड़ता है और निजी स्कूल इन्हें कितनी गंभीरता से लागू करते हैं।

 

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