जयप्रकाश नारायण जयंती जब गांधीजी के कदम से आहत हो गए थे जेपी, पत्नी का ब्रह्मचर्य लेना थी वजह
1977 में इंदिरा गांधी के विरोध में समूचे विपक्ष को एक मंच पर खड़ा करने वाले जयप्रकाश नारायण (जेपी) की आज 120वीं जयंती है। उनका एक किस्सा उस वक्त का है जब वे महात्मा गांधी से एक कदम से आहत हो गए थे।

जेपी का विवाह 1920 में प्रभावती देवी से हुआ था। उस वक्त उनकी उम्र 18 साल थी तो प्रभादेवी 14 साल की। शादी के कुछ वक्त बाद जेपी अकेले ही उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका के कैलिफोर्निया चले गए थे। इस बीच प्रभादेवी आजादी के आंदोलन में शामिल होने के लिए महात्मा गांधी के साथ जुड़ गईं। वे आश्रम में रहकर संयासिनी का जीवन बिता रही थी। इस बीच गांधी ने प्रभादेवी को ब्रह्मचर्य का पालन करने का आग्रह किया, जिसे उन्होंने मान लिया। जब जेपी वापस आए और उन्हें इसकी जानकारी हुई तो वो काफी आहत हुए।
गांधी जी ने पत्र लिखकर नाराजगी जताई थी
रिपोर्ट में कहा जाता है कि महात्मा गांधी ने जेपी को पत्र लिखकर नाराजगी जताई और बताया कि उनका फोकस आजादी पर होना चाहिए। बाद में उन्हें इल्म हुआ और उन्होंने गांधी जी से माफी मांगी। बताया यह भी जाता है कि गांधी जी ने वह पत्र प्रभादेवी की जानकारी के बगैर ही भेजा था।
जब 58 धोतियों से रस्सी बनाकर जेल से भागे
रिपोर्ट के मुताबिक, 1942 में जेपी ने महात्मा गांधी के साथ असहयोग आंदोलन में भाग लिया था। बिहार के सिताब दियारा गांव में जन्मे जेपी को अंग्रेजों ने हजाराबाग जेल में कैद कर रखा था। कहा जाता है कि जेल से भागने के लिए जेपी ने 58 धोतियों की रस्सी बनाई और भाग निकले। इसके बाद अंग्रेजों ने उन्हें देखते ही गोली मारने का आदेश भी सुनाया था।
जब जीत के बाद जुलूस नहीं इंदिरा से मिलने पहुंचे जेपी
1977 में जेपी आंदोलन की वजह से इंदिरा गांधी को हार का सामना करना पड़ा था। अब जनता पार्टी की सरकार सत्ता में पहुंची थी। ऐसे में दिल्ली के रामलीला मैदान पर विजय जुलूस निकाला जाना था। लगभग सभी नेता मैदान में जुटे थे। सिर्फ जेपी गायब थे। वे विजय जुलूस के बजाय पहुंचे इंदिरा गांधी से मिलने। बताया जाता है कि उन्हें देखते ही इंदिरा की आंखों में आंसू आ गए। जेपी भी रोने लगे। जेपी इंदिरा के प्रशासनिक कदमों से भले ही इत्तेफाक न रखते हों लेकिन, उन्हें अपनी बेटी की तरह मानते थे।



