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जंतर-मंतर पर गरजा युवा आक्रोश: अभिजीत दिपके के नेतृत्व में हजारों ‘कॉकरोच’ जुटे, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर 7 दिन का अल्टीमेटम

एम डी आरिफ अमन की रिपोर्ट…

राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर शनिवार को उस समय युवाओं के जोश और नारों से गूंज उठा, जब कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले देशभर से आए युवाओं ने विशाल धरना-प्रदर्शन में भाग लिया। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने स्वयं आंदोलन की कमान संभाली और मंच से केंद्र सरकार पर तीखे सवाल उठाए।
दिल्ली पुलिस की अनुमति के बाद आयोजित इस प्रदर्शन में उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, हरियाणा, पंजाब और अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में युवा पहुंचे। प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने खुद को गर्व से “कॉकरोच” बताते हुए कहा कि वे व्यवस्था के खिलाफ लोकतांत्रिक संघर्ष का हिस्सा हैं।
कार्यक्रम का सबसे चर्चित क्षण तब आया जब सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वंचुक मंच पर पहुंचे। उनके संबोधन ने उपस्थित युवाओं में नया जोश भर दिया। युवाओं ने रोजगार, शिक्षा सुधार, पारदर्शिता और युवाओं की राजनीतिक भागीदारी को लेकर जोरदार आवाज उठाई।

अपने संबोधन में अभिजीत दिपके ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए केंद्र सरकार को सात दिन का अल्टीमेटम दिया। उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित समय के भीतर युवाओं की मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर और तेज किया जाएगा।
दिपके ने कहा, “भारत की युवा शक्ति अब केवल दर्शक नहीं है। देश का युवा अपने अधिकारों, शिक्षा और भविष्य को लेकर जाग चुका है। सरकार को युवाओं की आवाज सुननी होगी।”


धरना स्थल पर मौजूद युवाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए हजारों युवाओं ने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें रखीं। पूरे कार्यक्रम के दौरान अनुशासन और शांति बनी रही तथा किसी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जंतर-मंतर पर युवाओं की यह बड़ी मौजूदगी कॉकरोच जनता पार्टी को राष्ट्रीय राजनीति में नई पहचान दिला सकती है। सोशल मीडिया पर भी #CockroachJanataParty और #YouthPower जैसे हैशटैग तेजी से ट्रेंड करते दिखाई दिए।
जंतर-मंतर का यह प्रदर्शन एक बार फिर यह संकेत दे गया कि देश का युवा वर्ग अब केवल चुनावी वादों से संतुष्ट नहीं है, बल्कि वह नीतिगत जवाबदेही और ठोस बदलाव की मांग कर रहा है। आने वाले सात दिन सरकार और आंदोलन दोनों के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

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