ग्वालियर में 320 करोड़ खर्च करने के बाद भी नसीब नहीं हो रहा पानी
केंद्र सरकार की अमृत योजना के तहत 320 करोड़ रुपए लागत से पाइप लाइन बिछाने और टंकियों का निर्माण करने के बाद भी लोग पानी के लिए परेशान हो रहे हैं। इतना ही नहीं आए दिन पानी की लाइनें फूटने से हजारों लीटर पानी सड़कों पर व्यर्थ बह रहा है।

ग्वालियर- शहर की 15 लाख की आबादी को साफ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार की अमृत योजना के तहत 320 करोड़ रुपए लागत से पाइप लाइन बिछाने और टंकियों का निर्माण करने के बाद भी लोग पानी के लिए परेशान हो रहे हैं। इतना ही नहीं आए दिन पानी की लाइनें फूटने से हजारों लीटर पानी सड़कों पर व्यर्थ बह जा रहा है। यही कारण है कि महापौर डा. शोभा सिकरवार एवं सभापति मनोज तोमर ने आज शाम चार बजे नगर निगम के प्रशासनिक भवन में अमृत योजना से जुड़े अधिकारियों व पीडीएमसी को बैठक में उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। इस सर्वदलीय बैठक में सांसद, मंत्रियों और विधायकों सहित निगम के नेता प्रतिपक्ष और एमआईसी मेंबर को भी आमंत्रित किया गया है।
– निगम में आज सर्वदलीय बैठक में उठेगा मुद्दा
इससे पहले प्रोजेक्ट उदय के अंतर्गत भी जनता को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 110 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। इन दोनों योजनाओं में 430 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। इसके बाद भी शहर में जगह-जगह पाइप लाइन फूट रही हैं। हर दिन किसी न किसी जगह से लाइन फूटने की घटनाएं सामने आती हैं। दरअसल, शहर की टंकियों में पानी पहुंचाने के लिए डाली गई मेन लाइन और डिस्ट्रीब्यूशन लाइनों को मानकों के अनुसार नहीं डाला गया है। इसकी वजह से ये लाइनें पानी के दबाव को झेल नहीं पा रही हैं। जिस क्षेत्र में पानी को ज्यादा दबाव के साथ सप्लाई किया जाता है, वहीं लाइन फट जाती है। 12 मीटर ऊपर यानी तीन मंजिल पर पानी पहुंचाने का नगर निगम का दावा फेल साबित हो रहा है। ग्वालियर विधानसभा के बिरला नगर और बहोड़ापुर क्षेत्र में सबसे ज्यादा लीकेज हैं। दक्षिण विधानसभा के गोल पहाड़िया क्षेत्र में लीकेज हैं। ग्वालियर पूर्व विधानसभा के हरिशंकर पुरम और मुरार क्षेत्र में लगातार लीकेज हो रहे हैं।



