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SIT Investigation : फर्जी मरीज बनने पर करते थे 15 हजार रुपये तक का भुगतान, दलालों को मिलता था बिल के अनुसार कमीशन

सेंट्रल इंडिया किडनी अस्पताल में फर्जी तरीके भर्ती होने वाले आयुष्मान हितग्राहियों को अस्पताल द्वारा दस से 15 हजार रुपये तक का भु्गतान किया जाता था। फर्जी मरीजों को अस्पताल तक लाने वाले कुछ दलालों को चार से 15 हजार रुपये दिए जाते थे।

जबलपुर।  सेंट्रल इंडिया किडनी अस्पताल में फर्जी तरीके भर्ती होने वाले आयुष्मान हितग्राहियों को अस्पताल द्वारा दस से 15 हजार रुपये तक का भु्गतान किया जाता था। फर्जी मरीजों को अस्पताल तक लाने वाले कुछ दलालों को चार से 15 हजार रुपये दिए जाते थे। जबकि कुछ दलालों को मरीजों के बिन के अनुसार कम या ज्यादा रुपयों का भुगतान किया जाता था। आयुष्मान कार्डधारी मरीज के अस्पताल से डिस्चार्ज होते ही दलाल व मरीज के हिस्से की राशि दलाल को दी जाती थी। दलाल अपने हिस्से के रुपये बचाकर शेष रकम मरीज को दे देता था। दलाल के अलावा अस्पताल के कुछ कर्मचारी भी आयुष्मान कार्डधारियों को बहला फुसलाकर अस्पताल में भर्ती कराने लाते थे और अस्पताल से कमीशन के रूप में दलालों की तरह रुपये भी लेते थे। यह जानकारी एसआईटी की जांच में मंगलवार को सामने आई है।

एसआईटी की जांच में खुलासा, सेंट्रल इंडिया किडनी अस्पताल का मामला
प्रकरण की जांच कर रही एसआईटी ने कई मरीजों से पूछताछ करते हुए दस्तावेजों को खंगाला है। जिसमें पता चला कि असल में उनको कोई बीमारी नही थे, लेकिन आयुष्मान कार्ड धारी होने के कारण अस्पताल में भर्ती रहने पर उन्हें 10 से 15 हजार रुपये मिले थे। बिना कुछ किए रुपये मिलने के लालच में वे अस्पताल में भर्ती रहे। एसआईटी अब ऐसे मरीजों की तस्दीक कर रही है, जो बिना बीमारी के मरीज बनकर अस्पताल में भर्ती हुए थे। एसआईटी की अब तक की जांच में यह बात स्पष्ट हो गई है कि होटल वेगा में सिर्फ उन लोगों को रखा जाता था, जो मरीज बनकर भर्ती होते थे। वर्तमान में अस्पताल संचालक दुहिता पाठक और उसके पति डा. अश्वनी पाठक जेल में बंद है।
दलाल के माध्यम से ही भर्ती होते थे फर्जी मरीज-
एसआईटी की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि फर्जी मरीजों को केवल दलालों के माध्यम से ही अस्पताल व होटल में भर्ती किया जाता था। सीधे तौर पर अस्पताल पहुंचने वालों को भगा दिया जाता था। एसआईटी द्वारा मरीजों से की जा रही पूछताछ में कई दलालों के नाम सामने आए हैं। अस्पताल के कुछ कर्मचारियों के नाम भी उजागर हुए हैं, जो आयुष्मान कार्डधारी को मरीज बनाकर अस्पताल में भर्ती करवाते थे। इन सबसे पूछताछ की जाएगी।

भुवन पर सिकंजा कसने की तैयारी-

आयुष्मान योजना के जिला समन्वयक भुवन साहू अब पूरी तरह से एसआईटी के निशाने पर आ चुका है। एसआइटी उस पर भी शिकंजा कसने की तैयारी में है। कुछ समय पूर्व तक यह समझा जा रहा था, वह सरकारी कर्मचारी है। जांच में यह उजागर हुआ कि वह प्राइवेट कंपनी का कर्मचारी है।एसआइटी उसकी हर गतिविध का पता लगा रही है। इसके पूर्व वह कहां पदस्थ था और क्या काम करता था। इसका भी पता लगाया जा रहा है।

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