7. पवित्र रमजान में रोजे रखें पर शुगर लेवल को नजरअंदाज न करें

पवित्र रमजान में रोजे रखें पर शुगर लेवल को नजरअंदाज न करें। खानपान में अनियमितता के कारण शुगर का बढ़ना (हाईपरग्लाइसीमिया) व घटना (हाईपोग्लाइसीमिया) दोनों घातक हैं। लिहाजा रमजान के रोजे नेक बंदों व डायबिटीज रोगियों के लिए कड़ी परीक्षा से कम नहीं हैं। डायबिटीज के चाहे टाइप-1 रोगी हों या टाइप-2, इबादत के दौरान सावधानी बरतनी चाहिए। रमजान में पूरी दिनचर्या प्रभावित रहती है। खान-पान और सोने जागने का शेड्यूल बदल जाता है।
पवित्र रमजान में लम्बे समय तक उपवास के दौरान कंपन, थकावट, थरथराहट, अधिक पसीना, चक्कर बेहोशी, धड़कन तेज होने की समस्या, शुगर लेबल कम होने की समस्या हो सकती है। टाइप वन व टू डायबिटीज में यह खतरा कई गुना अधिक होता है। रोजेदार को यह जानना जरूरी है कि यदि शुगर लेबल घट रहा हो तो उसे तुरंत रोजा तोड़कर कुछ मीठे पदार्थ एवं चिकित्सक की सलाह पर दवाएं लेनी चाहिए अन्यथा परेशानी बढ़ सकती है। रमजान के माह में अधिक चर्बी व कार्बोहाईड्रेट युक्त भोजन के साथ मिठाई का सेवन करने के कारण, शुगर टाइप-2 डायबिटीज में शुगर बढ़ने का खतरा पांच गुना तथा टाइप-1 में यह खतरा तीन गुना होता है। इसलिए शुगर बढ़ने पर रक्त में कीटोन्स का जमाव हो सकता है। जिसके चलते हालत बिगड़ सकती है। इसलिए पेशाब अधिक लगने, पेट दर्द, थकावट अधिक लगने पर सतर्क होकर तुरंत कीटोन की जांच कराएं। रमजान में इफ्तार पर लो केलौरी डाइट के साथ खानपान पर ध्यान दें एवं रमजान के पूर्व एचबीएएनसी की जांच कराएं। यदि यह 10 प्रतिशत से अधिक है तो उपवास मत रखें इसके अलावा हार्ट फेल्योर व एंजाईना के मरीज रोजे से दूर रहें।



