छत्तीसगढ़

चंगोराभाठा में अवैध निर्माण पर बुलडोजर: आखिर इतने दिन तक निगम सोता रहा या सबको थी खबर?

चार भवनों पर चला बुलडोजर, लेकिन सवालों के घेरे में निगम की निगरानी व्यवस्था

रायपुर। नगर निगम रायपुर के जोन क्रमांक-5 क्षेत्र अंतर्गत चंगोराभाठा स्थित पवार भवन के पीछे निर्माणाधीन चार भवनों पर टीम प्रहरी अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई की गई। निगम और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम ने थ्रीडी मशीन की सहायता से भवनों में निर्मित दीवार, कॉलम, बीम, छज्जा सहित अन्य निर्माणों को ध्वस्त कर दिया। निगम का दावा है कि निर्माण बिना अनुमति किया जा रहा था।
लेकिन इस कार्रवाई के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जिनके जवाब अब तक सामने नहीं आए हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि निर्माण वास्तव में अवैध था तो आखिर ये चार-चार भवन इतनी ऊंचाई तक बन कैसे गए? क्या निर्माण कार्य एक-दो दिन में हुआ था या कई महीनों से चल रहा था? यदि महीनों से निर्माण जारी था तो नगर निगम के जोन-5 के अधिकारी, इंजीनियर और नगर निवेश विभाग आखिर क्या कर रहे थे?


क्या इन भवनों का नक्शा रायपुर नगर निगम से स्वीकृत था? यदि नहीं था तो निर्माण की शुरुआती अवस्था में ही कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या संबंधित मकान मालिकों ने कभी निगम कार्यालय में भवन अनुज्ञा के लिए आवेदन किया था? यदि आवेदन किया था तो उसकी स्थिति क्या रही?
यह भी जांच का विषय है कि नगर निगम को इस निर्माण की जानकारी कब मिली? क्या निगम अधिकारियों ने स्वयं निरीक्षण में इसे पकड़ा या फिर किसी नागरिक, जनप्रतिनिधि अथवा प्रतिद्वंद्वी पक्ष ने शिकायत की थी? यदि शिकायत हुई थी तो शिकायतकर्ता कौन है और शिकायत की तिथि क्या है?
नियमों के अनुसार अवैध निर्माण के मामलों में नोटिस जारी किए जाते हैं। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या संबंधित भवन मालिकों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत पहला, दूसरा और तीसरा नोटिस जारी किया गया था? यदि नोटिस दिए गए थे तो उनकी प्रतियां सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही हैं? और यदि नोटिस नहीं दिए गए तो क्या कार्रवाई नियमों के अनुरूप हुई?
स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य लंबे समय से जारी था और क्षेत्र के जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी न हो, यह बात आसानी से हजम नहीं होती। ऐसे में सवाल केवल अवैध निर्माण का नहीं बल्कि निगरानी व्यवस्था की विफलता का भी है।
अब देखना यह होगा कि निगम प्रशासन केवल भवन मालिकों पर कार्रवाई कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेता है या फिर यह भी जांच करता है कि निर्माण कार्य के दौरान संबंधित क्षेत्र के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका क्या रही।
कड़क समाचार आने वाले अंकों में इस पूरे मामले की परत-दर-परत पड़ताल करेगा और सामने लाएगा कि आखिर चंगोराभाठा के इन निर्माणों के पीछे की सच्चाई क्या है, किसकी शिकायत पर कार्रवाई हुई, कितने नोटिस जारी हुए और निगम की जानकारी के बावजूद कहीं किसी स्तर पर लापरवाही या संरक्षण तो नहीं दिया गया।

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