छत्तीसगढ़

5. सिकल सेल पीड़िता की मौत पर दुर्ग में सियासी उबाल

दुर्ग ।  छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिला अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की कथित लापरवाही के चलते एक 22 वर्षीय सिकल सेल एनीमिया पीड़ित युवती की जान जाने का मामला अब पूरी तरह से गर्मा गया है. मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस घटना को लेकर जिला प्रशासन के खिलाफ आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है.

शहर कांग्रेस अध्यक्ष व पूर्व महापौर धीरज बाकलीवाल की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल ने अपर कलेक्टर योगिता देवांगन से मुलाकात कर तीखा विरोध दर्ज कराया और एक मांग पत्र सौंपा. कांग्रेस का सीधा आरोप है कि यदि अस्पताल प्रबंधन संवेदनशीलता दिखाता और समय पर रक्त की व्यवस्था कर देता, तो युवती को असमय काल के गाल में समाने से बचाया जा सकता था.

 

विवाद बढ़ता देख चिकित्सालय प्रबंधन अब बचाव की मुद्रा में नजर आ रहा है. पूरे मामले पर सिविल सर्जन डॉ. आशीषन मिंज ने सफाई देते हुए कहा है कि घटना की तह तक जाने के लिए एक आंतरिक जांच दल का गठन कर दिया गया है. 

 

उन्होंने भरोसा दिलाया है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद स्थिति पूरी तरह साफ हो जाएगी और जो भी डॉक्टर या स्वास्थ्य कर्मी इस कोताही के लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके विरुद्ध नियमानुसार दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे.

हालांकि, कांग्रेस इस विभागीय जांच से संतुष्ट नहीं है. पार्टी नेताओं का तर्क है कि अस्पताल प्रशासन के दायरे में होने वाली जांच कभी निष्पक्ष नहीं हो सकती, इसलिए पूरे मामले की कमान जिला प्रशासन अपने हाथ में ले और एक स्वतंत्र व पारदर्शी कमेटी से इसकी तफ्तीश कराए.

नियमों का हवाला देते हुए कांग्रेस ने कहा कि नियमानुसार सिकल सेल के मरीजों को बिना किसी शुल्क के तत्काल ब्लड मिलना चाहिए था, लेकिन पीड़िता को तकरीबन दो दिनों तक खून के लिए तड़पाया गया. इस दौरान उसकी तबीयत बिगड़ती चली गई और अंततः उसने दम तोड़ दिया.

पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में लीपापोती की गई या दोषियों को बचाने का प्रयास हुआ, तो वे चुप नहीं बैठेंगे. आने वाले दिनों में आम जनता और विभिन्न संगठनों को साथ लेकर जिला मुख्यालय पर उग्र प्रदर्शन, धरना और व्यापक स्तर पर लोकतांत्रिक आंदोलन छेड़ा जाएगा.

इस विरोध प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस ने दुर्ग जिला अस्पताल की पूरी कार्यप्रणाली को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है. सौंपे गए ज्ञापन में न केवल इस मृतका के लिए न्याय मांगा गया है, बल्कि अस्पताल की अन्य गंभीर कमियों को भी उजागर किया गया है.

नेताओं ने सवाल उठाया कि अस्पताल के शवगृह (मॉर्च्युरी) का डीप फ्रीजर पिछले पांच महीनों से बंद पड़ा है, जिससे शवों के रख-रखाव में भारी दिक्कतें आ रही हैं, लेकिन प्रशासन इस ओर से पूरी तरह आंखें मूंदे बैठा है.

इसके साथ ही, पूर्व में हुए नसबंदी शिविर हादसे का जिक्र करते हुए आरोप लगाया गया कि दो महिलाओं की मौत के बाद भी आज तक किसी रसूखदार पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. कांग्रेस ने अब मांग की है कि पुरानी घटनाओं की फाइलें दोबारा खोली जाएं, ब्लड बैंक की समीक्षा हो और पूरे अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं का एक विशेष ऑडिट कराया जाए.

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