जोन क्रमांक 4 भवन अनुज्ञा में खसरा नंबर ‘0’! क्या बिना भूमि दस्तावेज के जारी हुई अनुमति?
जोन क्रमांक 4 में क्या चल रहा है मामला?

एम. डी. आरिफ की रिपोर्ट…
रायपुर। नगर निगम में भवन निर्माण के लिए भवन अनुज्ञा जारी करने की प्रक्रिया में भूखंड से संबंधित दस्तावेज, स्वीकृत मानचित्र, सेटबैक, भवन की ऊंचाई, निर्माण का प्रयोजन सहित कई नियम एवं शर्तें निर्धारित हैं। भवन निर्माण से पहले आवेदक को संबंधित भूमि के दस्तावेज और खसरा विवरण के आधार पर स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी करनी होती है।
लेकिन रायपुर नगर निगम के जोन क्रमांक 4 से जुड़े एक मामले में आरटीआई के माध्यम से प्राप्त भवन अनुज्ञा संबंधी दस्तावेज में भूखंड का खसरा नंबर ‘0’ दर्ज होने की बात सामने आई है। यही स्थिति अब भवन अनुज्ञा की प्रक्रिया और संबंधित दस्तावेजों की जांच को लेकर कई सवाल खड़े कर रही है।
भवन निर्माण की अनुमति जारी करते समय जिस भूमि पर निर्माण प्रस्तावित है, उसके स्वामित्व एवं भू-अभिलेख से संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण किया जाना महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में सवाल यह है कि यदि भवन अनुज्ञा के दस्तावेज में खसरा नंबर ‘0’ दर्ज है, तो संबंधित भूमि का वास्तविक खसरा नंबर और भूमि संबंधी दस्तावेज निगम के रिकॉर्ड में किस आधार पर दर्ज किए गए?
सबसे बड़ा सवाल—खसरा नंबर ‘0’ कैसे?
आरटीआई से प्राप्त भवन अनुज्ञा की सत्यापित छायाप्रति में खसरा नंबर ‘0’ दर्ज होने के बाद संबंधित क्षेत्र के उप अभियंता से इस संबंध में जानकारी मांगी गई। पूछे जाने पर कथित तौर पर उप अभियंता ने “पटवारी से पता कर लीजिए” कहकर जानकारी लेने की बात कही।
अब सवाल यह है कि जिस भवन को नगर निगम ने भवन अनुज्ञा जारी की है, उसकी भूमि संबंधी मूल जानकारी की पुष्टि के लिए आवेदक या संबंधित नागरिक को पटवारी के पास भेजना ही पर्याप्त है या नगर निगम के अपने रिकॉर्ड में भी भूमि का स्पष्ट विवरण उपलब्ध होना चाहिए?
क्या बिना भूमि दस्तावेज के जारी हुई भवन अनुज्ञा?
यदि भवन अनुज्ञा जारी करने के समय आवेदक द्वारा भूमि की रजिस्ट्री, खसरा एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे, तो फिर स्वीकृत भवन अनुज्ञा में खसरा नंबर ‘0’ दर्ज होने का कारण क्या है?
और यदि ये दस्तावेज निगम के रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं थे, तो किस आधार पर भवन निर्माण की अनुमति जारी की गई?
क्या यह केवल रिकॉर्ड दर्ज करने की त्रुटि है, या फिर भवन अनुज्ञा जारी करने की पूरी प्रक्रिया की जांच की आवश्यकता है?
जिम्मेदारी किसकी?
इस मामले में अब एक और महत्वपूर्ण सवाल सामने आ रहा है—यदि दस्तावेजों में वास्तव में कोई गंभीर विसंगति है, तो इसकी जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी?
क्या संबंधित अभियंता ने दस्तावेजों का परीक्षण किया था?
क्या उप अभियंता की जांच के बाद भवन अनुज्ञा जारी हुई?
क्या जोन कमिश्नर के स्तर पर रिकॉर्ड की जांच हुई?

और यदि खसरा नंबर ‘0’ ही दर्ज था, तो भवन अनुज्ञा जारी करने से पहले इस विसंगति पर सवाल क्यों नहीं उठाया गया?
फिलहाल उपलब्ध दस्तावेज और संबंधित अधिकारी से हुई बातचीत कई सवाल जरूर खड़े करती है। हालांकि, इस मामले में वास्तविक स्थिति क्या है, यह निगम के मूल भवन अनुज्ञा आवेदन, संलग्न भूमि दस्तावेज, स्वीकृत मानचित्र और संबंधित अधिकारियों के रिकॉर्ड के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
अब देखना यह है कि रायपुर नगर निगम जोन क्रमांक 4 इस मामले में दस्तावेजों की जांच कर स्थिति स्पष्ट करता है या नहीं।



