1. शराब घोटाले में जेल से रिहा होंगे पूर्व मंत्री कवासी लखमा, सुप्रीम कोर्ट से सशर्त जमानत…

रायपुर : शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किए गए छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा आज जेल से बाहर आएंगे। सुप्रीम कोर्ट से उन्हें सशर्त अंतरिम जमानत मिलने के बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। वह करीब एक साल से न्यायिक हिरासत में जेल में बंद थे।
सुप्रीम कोर्ट से मिली सशर्त अंतरिम जमानत:
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में छत्तीसगढ़ शराब घोटाले को लेकर लगभग ढाई घंटे तक सुनवाई चली। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने कवासी लखमा को शर्तों के साथ अंतरिम जमानत प्रदान की।
कोर्ट द्वारा लगाई गई प्रमुख शर्तें:
कवासी लखमा को छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर रहना होगा
केवल कोर्ट में पेशी के दौरान ही राज्य में प्रवेश की अनुमति
पासपोर्ट जमा करना अनिवार्य
अपना पता और मोबाइल नंबर संबंधित पुलिस थाने में दर्ज कराना होगा।
15 जनवरी 2025 को हुई थी गिरफ्तारी:
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कवासी लखमा को 15 जनवरी 2025 को शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार किया था। इसके बाद ईओडब्ल्यू (EOW) ने भी इस मामले में केस दर्ज किया। हाल ही में ED ने उनके खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की है।
ED का आरोप: सिंडिकेट के अहम सदस्य थे लखमा:
ED के अनुसार, कवासी लखमा शराब सिंडिकेट के प्रमुख सदस्यों में शामिल थे। आरोप है कि उनके निर्देश पर ही पूरा सिंडिकेट काम करता था और शराब नीति में बदलाव कर सिंडिकेट को फायदा पहुंचाया गया। एजेंसी का दावा है कि लखमा की भूमिका शराब कारोबारियों को संरक्षण देने में अहम थी।
हर महीने 2 करोड़ रुपये कमीशन का आरोप:
यह कथित शराब घोटाला उस समय हुआ जब राज्य में भूपेश बघेल सरकार थी और कवासी लखमा आबकारी मंत्री थे। जांच एजेंसियों के मुताबिक, शराब माफियाओं को लाभ पहुंचाने के बदले उन्हें हर महीने करीब 2 करोड़ रुपये कमीशन मिलता था।
क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला?
ED के अनुसार, छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में करीब 3,200 करोड़ रुपये से अधिक के भ्रष्टाचार का अनुमान है। FIR में कई राजनेताओं, वरिष्ठ अधिकारियों और कारोबारियों के नाम शामिल बताए गए हैं। इस कथित घोटाले में IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के तत्कालीन MD एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट की भूमिका सामने आई है।



