छत्तीसगढ़

8. कैंसर के हर तीन में से दो मामले महिलाओं में, भूलकर भी न करें ये गलती, इन बातों का रखें खास ध्यान

कैंसर दुनियाभर में होने वाली मौतों के प्रमुख कारणों में से एक है। लगभग सभी उम्र वालों में इसका खतरा देखा जाता रहा है। महिलाओं में ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर के मामले सबसे कॉमन हैं, जबकि पुरुषों में लंग्स और प्रोस्टेट कैंसर के मामले सबसे ज्यादा रिपोर्ट किए जाते रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार मंत्रालय द्वारा साझा की गई जानकारियों के मुताबिक कैंसर के कारण साल 2022 में आठ लाख लोगों की जान गई। पिछले साल 14.61 लाख से अधिक लोगों में कैंसर का पता चला, 2020 जुलाई से 2023 तक में 69,000 मामलों में वृद्धि हुई है।

कैंसर के जोखिमों को लेकर जारी एक हालिया रिपोर्ट में वैज्ञानिकों की टीम ने कहा, यदि समय पर स्क्रीनिंग और निदान में तेजी लाई गई होती तो देश में महिलाओं में कैंसर से संबंधित 63% मौतों को रोका जा सकता था। गौरतलब है कि कैंसर का जितनी शीघ्रता से निदान होता है, जान बचने की संभावना उतनी बढ़ जाती है।

महिलाओं में कैंसर का बढ़ता जोखिम

कैंसर के कारण होने वाली मौत और इसके जोखिमों को लेकर द लैंसेट जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक कैंसर के जोखिमों को लेकर हमें गंभीरता से ध्यान देते रहने की जरूरत है। कैंसर का निदान ज्यादातर मामलों में तभी हो पा रहा है जब रोग गंभीर स्थिति में पहुंच जाता है। यह वैश्विक स्वास्थ्य के लिए बड़ा जोखिम है।

2020 में 50 वर्ष से कम आयु के जिन 30 लाख वयस्कों में कैंसर का पता चला, उनमें से हर तीन में से दो महिलाएं थीं। कैंसर महिलाओं में मृत्यु दर का एक प्रमुख कारण है। इससे बचाव को लेकर उपाय करते रहना बहुत आवश्यक है।

कैंसर के लिए ये हैं प्रमुख जोखिम कारक

शोधकर्ताओं की टीम ने महिलाओं में बढ़ते रोग के खतरे को समझने की कोशिश की, इसके अनुसार 2020 में कैंसर से पीड़ित लगभग 1.3 मिलियन महिलाओं की मौत के लिए कैंसर के चार प्रमुख जोखिम कारकों- तंबाकू, शराब, मोटापा और संक्रमण को जिम्मेदार पाया गया है।

महिलाओं में स्तन और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर सबसे ज्यादा देखे जाते रहे हैं। वहीं हर साल 70 वर्ष से कम उम्र की लगभग 300,000 महिलाएं लंग्स कैंसर और 1.60 लाख महिलाएं कोलोरेक्टल कैंसर के कारण मौत का शिकार होती हैं।

कैंसर से बचाव के लिए करें ये काम

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, महिलाओं को 40 वर्ष की आयु के बाद से हर साल वार्षिक मैमोग्राम कराना चाहिए। स्तन कैंसर के उच्च जोखिम वाली महिलाओं को पहले से ही जांच शुरू करने की आवश्यकता हो सकती है। 30 साल की उम्र तक अपने जोखिम के बारे में डॉक्टर से बात करना सबसे अच्छा है, जल्दी निदान हो जाने से रोग के गंभीर स्थिति में पहुंचने का खतरा और इसके कारण मृत्यु के जोखिम को कम किया जा सकता है।

लाइफस्टाइल को ठीक रखना भी जरूरी

डॉक्टर्स की टीम कहती है, कैंसर के कारण होने वाले जोखिमों को कम करने में समय पर टेस्टिंग मददगार हो सकती है। साथ ही सभी लोगों को लाइफस्टाइल को ठीक रखना बहुत आवश्यक है। धूम्रपान और शराब से बचाव, हानिकारक यूवी विकिरण से बचाव, वजन को कंट्रोल रखना आपमें कैंसर के साथ कई प्रकार की अन्य क्रोनिक बीमारियों के जोखिमों से बचाने वाली हो सकती है। सभी लोगों को कम उम्र से ही सुरक्षात्मक तौर पर इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

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