“एक यूनिट रक्त भी नहीं जुटा सका सिस्टम! आखिर युवती की मौत का जिम्मेदार कौन?”
दुर्ग जिला अस्पताल में रक्त के अभाव में गई जान, परिजनों ने शासन-प्रशासन और स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल

दुर्ग जिला अस्पताल में भर्ती 22 वर्षीय युवती की कथित तौर पर समय पर रक्त नहीं मिलने से हुई मौत ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की तैयारियों और जिम्मेदारी पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। परिजनों का आरोप है कि इमरजेंसी स्थिति के बावजूद अस्पताल प्रबंधन आवश्यक रक्त उपलब्ध नहीं करा सका, जिसके कारण उपचार में देरी हुई और युवती ने दम तोड़ दिया।
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब जिला अस्पताल जैसे प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में आपातकालीन मरीजों के लिए रक्त की तत्काल व्यवस्था नहीं हो सकती, तो आम नागरिकों की सुरक्षा और जीवन रक्षा की जिम्मेदारी कौन निभाएगा? क्या शासन द्वारा स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के दावे केवल कागजों तक सीमित हैं?

परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। वहीं यह मामला स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं, रक्त बैंकों की उपलब्धता और आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
प्रश्न जो जवाब मांग रहे हैं:
जिला अस्पताल में आपातकालीन रक्त भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था क्यों नहीं थी?
संकट की घड़ी में मरीज को रक्त उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी किसकी है?
स्वास्थ्य सुविधाओं पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद ऐसी घटनाएं क्यों हो रही हैं?
क्या इस मौत के लिए किसी अधिकारी या जिम्मेदार व्यक्ति की जवाबदेही तय होगी?
समापन पंक्ति:
“जब एक यूनिट रक्त के अभाव में जीवन बुझ जाए, तो सवाल केवल अस्पताल पर नहीं, पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था और उसके संचालन पर खड़े होते हैं।”




