“सवालों से घिरी सरकार: आखिर जवाब देने से क्यों बच रहे हैं प्रधानमंत्री?”

देश की राजनीति में इस समय सबसे बड़ा मुद्दा बेरोज़गारी, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था की बदहाली बन चुका है। विपक्ष लगातार सरकार पर हमला बोल रहा है और सवाल पूछ रहा है कि जब लाखों युवा अपने भविष्य को लेकर सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं, तब सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग आखिर चुप क्यों हैं?
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे पोस्टरों और नारों ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाने में लगी हुई है, जबकि युवाओं का भविष्य लगातार संकट में पड़ता जा रहा है।

पोस्टर में तीखे अंदाज़ में सवाल उठाए गए हैं —
“पेपर लीक क्यों हो रहे हैं?”
“‘परीक्षा पे चर्चा’ करने वाले अब चुप क्यों हैं?”
“फेल हो रहे शिक्षा मंत्री पर कार्रवाई क्यों नहीं?”
इन सवालों के जरिए विपक्ष सीधे प्रधानमंत्री की जवाबदेही तय करने की कोशिश कर रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि युवाओं से जुड़े मुद्दे आने वाले चुनावों में बड़ा असर डाल सकते हैं।
देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों छात्र लगातार परीक्षा रद्द होने, पेपर लीक और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी से परेशान हैं। ऐसे में सरकार की चुप्पी विपक्ष को हमला करने का बड़ा मौका दे रही है।
अब देखना यह होगा कि सरकार इन सवालों का खुलकर जवाब देती है या फिर राजनीतिक बयानबाज़ी का दौर इसी तरह जारी रहेगा।




