छत्तीसगढ़

मंचों पर सख्ती के दावे, ज़मीन पर ढिलाई! अवैध प्लॉटिंग और अतिक्रमण पर घिरीं महापौर मीनल चौबे

रायपुर। रायपुर नगर निगम की महापौर मीनल चौबे एक ओर हर सार्वजनिक मंच से अवैध प्लॉटिंग और अतिक्रमण पर सख्त कार्रवाई की बात करती नजर आती हैं, लेकिन दूसरी ओर ज़मीनी हकीकत उनके दावों से बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। शहर में लगातार ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जहां रसूखदारों और करोड़पति कारोबारियों पर कार्रवाई केवल नोटिसों तक सीमित होकर रह गई है। इससे अब महापौर की कथनी और करनी पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।

नगर निगम के दो अलग-अलग कमिश्नरों द्वारा शहर के दो बड़े रसूखदारों को बार-बार नोटिस जारी किए जाने के बावजूद आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होना आम जनता के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोप है कि निगम प्रशासन “नोटिस पर नोटिस” देने का खेल खेल रहा है और संबंधित संचालकों को लगातार “तारीख पर तारीख” दी जा रही है।


सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब गरीबों के छोटे अतिक्रमण हटाने की बात आती है, तब निगम प्रशासन केवल 3 से 7 दिन का समय देकर तत्काल बुलडोजर चला देता है। लेकिन जब मामला बड़े कारोबारियों और प्रभावशाली लोगों का आता है, तब वही प्रशासन महीनों तक कार्रवाई करने से बचता नजर आता है।
अमोरा पार्क और THD होटल मामला बना चर्चा का केंद्र
शहर में इस समय दो बड़े मामले सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। पहला मामला जोन क्रमांक 10 स्थित अमोरा पार्क का है, जहां नोटिस जारी होने के बावजूद अब तक बुलडोजर नहीं चला। दूसरा मामला प्रोग्रेसिव पॉइंट स्थित THD होटल का है, जहां अतिक्रमण हटाने की पूरी तैयारी हो चुकी थी। पुलिस बल भी मौके पर पहुंच चुका था और कार्रवाई लगभग तय मानी जा रही थी, लेकिन अचानक टीम वापस लौट गई। इसके बाद से संचालकों को लगातार नई तारीखें दिए जाने की चर्चा जोरों पर है।
इन घटनाओं ने जनता के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर ऐसा क्या हुआ कि कार्रवाई अंतिम समय में रोक दी गई? क्या रसूख और पैसे का दबाव निगम प्रशासन पर हावी हो गया है? या फिर नियम सिर्फ गरीबों के लिए ही बनाए गए हैं?
अमीरों के लिए नए नियम बनाने की तैयारी?
सूत्रों के अनुसार जिन लोगों ने अवैध अतिक्रमण कर व्यावसायिक परिसर खड़े किए और प्रतिदिन लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं, उनके लिए अब समायोजन और रेगुलराइजेशन के नए रास्ते तलाशे जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि ऐसे मामलों को वैध करने के लिए दस्तावेजी प्रक्रिया भी तैयार की जा रही है। यदि ऐसा है, तो यह सीधे-सीधे उन लोगों के साथ अन्याय माना जाएगा, जो वर्षों से नियमों का पालन करते आए हैं।
इस पूरे मामले पर अखबारों में लगातार खबरें प्रकाशित हो रही हैं और स्वतंत्र पत्रकार भी अपने लेखों के माध्यम से सवाल उठा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद महापौर मीनल चौबे की ओर से कोई ठोस और निर्णायक कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही।
जनता में बढ़ रहा आक्रोश
शहर की जनता अब खुलकर सवाल पूछ रही है कि क्या महापौर के मंचीय भाषण केवल राजनीतिक बयानबाजी बनकर रह गए हैं? यदि कार्रवाई करनी ही नहीं है, तो बार-बार सख्ती के दावे क्यों किए जा रहे हैं?
जनता का कहना है कि यदि आने वाले समय में भी रसूखदारों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो लोगों का आक्रोश सड़कों पर उतर सकता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि महापौर मीनल चौबे अपने वादों पर अमल करती हैं या फिर अवैध अतिक्रमण और प्लॉटिंग के मामलों में यह “नोटिस और तारीख” का खेल यूं ही चलता रहेगा।

Related Articles

Back to top button