छत्तीसगढ़ ने जिस पर जताया भरोसा, वही चुना गया राष्ट्रीय अध्यक्ष
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनने के लिए 24 साल बाद कांग्रेस मुख्यालय पहुंचे पीसीसी प्रतिनिधियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। कार्यकर्ताओं के जोश का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 311 पीसीसी प्रतिनिधियों में सिर्फ पांच ऐसे थे, जो मतदान करने नहीं पहुंचे।

रायपुर। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनने के लिए 24 साल बाद कांग्रेस मुख्यालय पहुंचे पीसीसी प्रतिनिधियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। कार्यकर्ताओं के जोश का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 311 पीसीसी प्रतिनिधियों में सिर्फ पांच ऐसे थे, जो मतदान करने नहीं पहुंचे। जो मतदान नहीं कर पाए, उनके पास कारण भी था। कोई बीमार था तो किसी की असमय मृत्यु हो गई है।
राजीव भवन पहुंचे कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने बताया कि 24 साल पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के लिए रायपुर के रंगमंदिर में मतदान हुआ था। उस समय अध्यक्ष पद की प्रत्याशी सोनिया गांधी और जितेंद्र प्रसाद थे। उस समय छत्तीसगढ़ के 199 पीसीसी प्रतिनिधियों ने सोनिया गांधी के पक्ष में मतदान किया था।
राजीव भवन मतदान करने पहुंचे वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने बताया कि उस समय गांधी परिवार को यह आशंका थी कि विद्याचरण शुक्ल उनकी उम्मीदवारी का विरोध करेंगे। इसे दूर करने के लिए विद्याचरण ने मतदान के बाद बैलेट पेपर को सार्वजनिक रूप से दिखाया, जिसमें उन्होंने सोनिया गांधी के पक्ष में मतदान किया था।
अब मल्लिकार्जुन खड़गे और शशि थरूर मैदान में हैं। लंबे समय बाद गांधी परिवार से बाहर के किसी व्यक्ति को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनने के लिए मतदान हुआ। वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस के प्रतिनिधियों ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए जिस नेता पर भरोसा जताया, उसकी ही जीत हुई। इस बार अधिकांश नेता खड़गे के पक्ष में खड़े नजर आए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि मतदान से साबित हो गया कि किसी राजनीतिक दल में लोकतंत्र है, तो वह कांग्रेस में है।
कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और विधायक विकास उपाध्याय राजीव भवन में मतदान करने के लिए भटकते रहे। दरसअल, विकास का नाम पीसीसी प्रतिनिधि में शामिल नहीं था। उन्होंने निर्वाचन अधिकारी हुसैन दलवई से कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारियों को मतदान करने का अधिकार है। वह अपने साथ एक पत्र भी लेकर आए थे, लेकिन दलवई ने यह कहकर उन्हें वोट डालने से रोक दिया कि उनके पास मतदाताओं की जो सूची आई है, उसमें उनका नाम नहीं है।
बीमार मतदाताओं ने पत्र भेजकर वोट डालने की कोशिश की
प्रदेश के पांच मतदाताओं ने वोट नहीं डाले। इनमें संजय पाठक और लक्ष्मण चंद्राकर ने बीमारी का हवाला देकर उनके स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति को मतदान करने की अनुमति मांगी। चुनाव अधिकारी दलवई ने नियमों का हवाला देकर उनकी मांग को खारिज कर दिया। वहीं, धर्मेंद्र यादव और अमीन मेमन भी मतदान नहीं कर पाए।
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