छत्तीसगढ़

और बदरंग होगा चेहरा?

पिछले साल तक वह प्रेस फ्रीडम के लिहाज से ‘समस्याग्रस्त’ देशों की श्रेणी में था। अब उसे उन देशों के बीच रखा गया है, जिनकी स्थिति ‘अत्यंत गंभीर’ मानी गई है। इस रिपोर्ट में कही गई कुछ बातें ध्यान खींचती हैं।

इस बार विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर जारी हुए प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में भारत का चेहरा कुछ और बदरंग दिखा है। यह इंडेक्स पेरिस स्थित संस्था रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर जारी करती है। पिछले कई वर्षों से इस सूचकांक पर भारत का दर्जा गिरता गया है। पिछले साल इस सूची में 150वें नंबर पर था। इस बार वह 11 स्थान गिर कर 161वें नंबर पर पहुंच गया। इस इंडेक्स में भारत अब सबसे निचली श्रेणी में है। पिछले साल तक वह प्रेस फ्रीडम के लिहाज से ‘समस्याग्रस्त’ देशों की श्रेणी में था। अब उसे उन देशों के बीच रखा गया है, जिनकी स्थिति ‘अत्यंत गंभीर’ मानी गई है। इस रिपोर्ट में कही गई कुछ बातें ध्यान खींचती हैं।

मसलन, यह कि भारत में कुछ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के धनी-मानी मित्रों ने मीडिया पर कब्जा जमा लिया है। कहा गया है कि कभी भारतीय प्रेस को अपेक्षाकृत प्रगतिशील समझा जाता था, लेकिन हिंदू राष्ट्रवादी प्रधानमंत्री के सत्ता में आने के बाद स्थितियां बदल गईं। इसमें बीबीसी के दफ्तर पर मारे गए छापे का जिक्र है और उसका सीधा संबंध बीबीसी पर गुजरात दंगों के बारे में दिखाई गई डॉक्यूमेंटरी से बताया गया है।

रिपोर्ट कहती है कि वैसे तो दुनिया भर में प्रेस की आजादी के लिए संकट पैदा हो रहा है। दुष्प्रचार, एकतरफा प्रचार और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस ने पत्रकारिता के लिए खतरे पैदा कर दिए हैं। इन खतरों के बीच सच और झूठ, सही और गलत की पहचान मुश्किल हो गई है। मगर इन विश्वव्यापी प्रवृत्तियों के बीच कुछ देश ऐसे हैं, जहां हालात बेहद गंभीर रूप ले चुके हैं। ऐसे देशों में रूस, तुर्किये और ताजिकिस्तान के साथ-साथ भारत का भी जिक्र किया गया है। पिछले वर्षों के तजुर्बे के आधार पर यह तो साफ है कि मौजूदा भारत सरकार ऐसी रिपोर्टों की तनिक भी परवाह नहीं करती। उसके बाद ऐसी हर रिपोर्ट का तैयारशुदा जवाब है, जिसमें भारत का दर्जा गिरता दिखाया जाता है। मगर भारत की सत्ताधारी पार्टी ही और आज की सरकार ही भारत नहीं हैं। एक देश और लोकतांत्रिक समाज के तौर पर भारत के लिए यह रिपोर्ट पहले से जारी चिंताओं को और बढ़ा गई है।

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