8. पटवारी के फर्जी हस्ताक्षर कर बनाए कागजात, उप पंजीयक ने सरकारी जमीन की कर दी रजिस्ट्री

रायपुर : राजधानी में रजिस्ट्री कार्यालय में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। उप पंजीयक आकाश देवांगन ने एक शासकीय जमीन की रजिस्ट्री कर दी है। जबकि ऑनलाइन सिस्टम में जमीन शासकीय दर्ज की गई है। रजिस्ट्री कराने वाले ने पंजीयन के दौरान जो दस्तावेज लगाए हैं उसमें पटवारी का फर्जी हस्ताक्षर कर शासकीय जमीन को निजी भूमि बता दिया है।
जबकि रजिस्ट्री की प्रक्रिया में ऑनलाइन भुईंयां पोर्टल में भूमि की जानकारी देखे बिना उप पंजीयक रजिस्ट्री नहीं कर सकते। जमीन का खसरा नंबर एंट्री करते ही सॉफ्टवेयर जमीन की जानकारी बता देता है। चौंकाने वाली बात यह है कि ऑनलाइन बी-1 की कॉपी में पटवारी के डिजिटल सिग्नेचर होते हैं। यह पहला मामला है कि पटवारी का फर्जी डिजिटल सिग्नेचर बनाकर गोलमाल किया गया है।
रेकॉर्ड में 50 साल पहले से शासकीय जमीन दर्ज
जब पटवारी ने उक्त भूमि के संबंध में राजस्व अभिलेख में रेकार्ड खंगाला तो यह पाया कि उक्त खसरा नंबर 229 रकबा 0.146 हेक्टेयर शासकीय भूमि व कैफियत कॉलम में आबादी से खेत जाने का रास्ता दर्ज है। इसके अलावा 50 साल पुराने अधिकार अभिलेख में उक्त खसरा सड़क मद में दर्ज है।
सेजबहार पहटवारी हल्का क्रमांक 82 स्थित भूमि खसरा नंबर 229 का भाग रकबा 900 वर्गफुट जमीन की रजिस्ट्री दानपत्र पटवारी आईडी में रजिस्ट्री ऑफिस से मिली है। पंजीकृत दानपत्र को दानदाता कालीनगर वार्ड क्रमांक 51 निवासी छगन साल साहू द्वारा दान लेने वाली महिला कालीनगर वार्ड क्रमांक 51 निवासी कृष्णा बाई साहू के पक्ष में 19 अक्टूबर को रजिस्ट्री कराया है।
उक्त पंजीकृत दानपत्र का अवलोन करने पर यह पाया कि उक्त दानपत्र में संलग्न नजरी नक्शा व डिजिटल हस्ताक्षरित खसरा में पटवारी का फर्जी हस्ताक्षर व सील लगा हुआ है जबकि पटवारी द्वारा कभी भी उक्त नजरी नक्शा तैयार नहीं किया गया है। बी-1 व नजरी नक्शा में हस्ताक्षर भी पटवारी का नहीं है और ना ही क्रेता और विक्रेता पक्ष ने कभी भी पटवारी कार्यालय से जानकारी ली है।
मामले की शिकायत मिली है। इसे विवादित नामांतरण की श्रेणी में रखकर अतिरिक्त तहसीलदार द्वारा सुनवाई की जाएगी। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
देवेंद्र पटले, एसडीएम, रायपुर



