राष्ट्रीयव्यापार

नान जीएम सोयाबीन में भारत बन सकता है ब्रांड, सोया उद्योगों ने मांगी निर्यात नीति में राहत

इंदौर में दो दिनी अंतरराष्ट्रीय सोया कान्क्लेव की शुरुआत, केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और प्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल ने किया औपचौरिक उद्घाटन, सोपा के चेयरमैन देविश जैन ने कान्क्लेव को किया संबोधित।

इंदौर। कोविड के दौर के बाद बदले परिदृश्य में सोयाबीन का व्यापार भी कठिन दौर से गुजर रहा है। भारत से सोयामील का निर्यात लगभग थम गया है। अंतरराष्ट्रीय सोया कान्क्लेव की शुरुआत करते हुए दि सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (सोपा) के चेयरमैन देविश जैन ने यह बात कही। इंदौर में शनिवार से शुरू हुए दो दिनी कान्क्लेव के उद्घाटन अवसर पर सोया इंडस्ट्रीज से जुड़े उद्योगों ने मांग रखी कि सरकार को सोयामील निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए शुल्क, परिवहन खर्च में छूट देनी चाहिए।

कान्क्लेव का औपचारिक उद्घाटन केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और प्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल ने किया। गडकरी आनलाइन कान्क्लेव में शामिल हुए थे। सोया उद्योगों की ओर से वर्तमान की स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर बात रखते हुए सोपा ने कहा कि बीते दो वर्ष सोया उद्योगों के लिए मुश्किल भरे रहे। देश में सोयाबीन की कीमतें उच्चतम स्तर पर जाने के चलते निर्यात रुक गया। जैन ने कहा कि विश्व व्यापार संग़ठन के नियमों के अनुसार सरकार सोयामील निर्यात पर इंसेंटिव नहीं दे सकती, लेकिन देश के निर्यातकों को देश के भीतर ही सोयामील परिवहन की लागत अंतरराष्ट्रीय फ्रेट भाड़े से ज्यादा पड़ती है। 9 से 10 प्रतिशत के अन्य घरेलू शुल्क व खर्च सोयामील की लागत में जुड़ रहे हैं। सरकार को फ्रेट शुल्क और आंतरिक खर्च टैक्स पर छूट देनी चाहिए। यदि सरकार राहत देती है तो मौजूदा परिस्थिति में सोयामील का निर्यात 40 लाख टन तक हो सकता है। इससे दो बिलियन डालर देश में आएंगे।

उत्पादन बढ़ेगा

सोपा के अनुसार, देश में सोयाबीन का उत्पादन 120 से 125 लाख टन रहने की उम्मीद है। 2025 तक उत्पादन का आंकड़ा 160 लाख टन और 2030 तक दो करोड़ टन तक पहुंच सकता है। बशर्ते सरकार सोयाबीन उपजाने के लिए किसानों को, निर्यात के लिए उद्योगों को राहत दे। सोपा ने कहा कि देश में अब भी प्रति हेक्टेयर सोयाबीन उतपादन कम है। ऐसे में देश में किसानों को अच्छा बीज सरकार द्वारा पहल कर उपलब्ध करवाने की जरूरत है। किसानों को अच्छे दाम मिले, इसलिए खाद्य तेल के निर्यात की मात्रा पर नियंत्रण की जरूरत है। सोपा ने सरकार द्वारा हाल की में देश में 0 प्रतिशत शुल्क पर आयात किए तीन तरह के खाद्य तेलों के आयात की निर्णय को उद्योगों और किसानों के लिए प्रतिकूल बताया।

  • नान जीएम की ब्रांडिंग करें

सोपा ने कहा कि सिर्फ भारत समेत कुछ ही देश है जो नान जीएम सोयाबीन उगाते हैं। इसमें भारत सबसे बड़ा उत्पादक है। सरकार को ब्रांड इंडिया फंड के तहत नान जीएम सोया को देश यूएसपी बनाकर ब्रांडिंग करना चाहिए।

  • सोपा लाएगा क्वालिटी सील

कान्क्लेव में सोपा ने एलान किया कि जल्द ही सोपा एल क्वालिटी सील लांच करेगा। सोयाबीन तेल व उत्पादों का परीक्षण कर गुणवत्तापूर्ण उत्पादों पर सोपा की सील रहेगी। ताकि देश के उपभोक्ताओं को सही उत्पाद मिल सके।

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