महाराष्ट्र की तरह मध्य प्रदेश में भी आकाश में उड़ते लालटेनों पर प्रतिबंध लगाने के लिए गृह मंत्रालय को लिखा पत्र
नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने राज्य के गृहमंत्रालय को एक पत्र भेजा गया है। इसके जरिए आकाश में उड़ते लालटेनों पर प्रतिबंध लगाए जाने की मांग की गई है। पत्र में कहा गया है कि आतिशबाजी के ये बेहद खतरनाक सामान हैं।

जबलपुर। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने राज्य के गृहमंत्रालय को एक पत्र भेजा गया है। इसके जरिए आकाश में उड़ते लालटेनों पर प्रतिबंध लगाए जाने की मांग की गई है। पत्र में कहा गया है कि आतिशबाजी के ये बेहद खतरनाक सामान हैं, इनसे अग्नि दुर्घटना का खतरा बना रहता है। साथ ही जन स्वास्थ्य के लिए भी से हानिकारक हैं, इसलिए इनकी बिक्री और उपयोग को सख्ती से रोक दिया जाना चाहिए। महाराष्ट्र शासन ने 30 दिन के लिए इनके इस्तेमाल को प्रतिबंधित कर दिया है। मुंबई में 16 अक्टूबर से 14 नवंबर तक प्रतिबंध लागू रहेगा। इसी तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी निर्णय लिया जाए।
मंच के डा.पीजी नाजपांडे, रजत भार्गव, आशुतोष द्विवेदी व डीआर लखेरा का कहना है कि आकाश में उड़ती लालटेन को बनाने में हाईड्रोजन गैस, क्लोरेट व लीथिलियम का उपयोग किया जाता है। मध्य प्रदेश के गृह मंत्रालय ने प्रतिबंधित पटाखों के संबंध में जो आदेश जारी किया है, उसमें आकाश में उड़ने वाली लालटेन का जिक्र नहीं है। लिहाजा, नए सिरे से कलेक्टर व पुलिस अधीक्षकों को इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
क्लीनिक में मिला अमानक पालीथिन का भंडारण
जबलपुर। प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने अपर कलेक्टर नम: शिवाय अरजरिया के नेतृत्व में शुक्रवार की शाम प्रतिबंधित पालीथिन को लेकर कार्रवाई की। इस दौरान प्रतिबंधित पालीथिन का भंडारण एवं विक्रय करते पाए जाने पर गढ़ा क्षेत्र की दो दुकानों को सील कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान कौशल प्लास्टिक जनरल स्टोर और इसके बगल की रंजीत क्लीनिक का बोर्ड लगी दुकान को सील किया गया है। कौशल प्लास्टिक जनरल स्टोर के संचालक द्वारा रंजीत क्लीनिक का प्रतिबंधित एवं अमानक प्लास्टिक भण्डारण के लिये इस्तेमाल किया जा रहा था।



