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13. बस्तर में फैल रहा मिक्स मलेरिया, 8426 लोग संक्रमित; जानें लक्षण और बचाव के तरीके

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में इस साल मलेरिया के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि अब कई मरीजों में मिक्स मलेरिया पाया जा रहा है. इसका मतलब है कि एक ही के शरीर में मलेरिया फैलाने वाले पी. फाल्सीपेरम और पी. विवैक्स दोनों तरह के परजीवी एक साथ मिल रहे हैं. डॉक्टरों के अनुसार यह सामान्य मलेरिया की तुलना में अधिक खतरनाक हो सकता है.
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2026 से अब तक बस्तर संभाग में 8,426 मलेरिया मरीज सामने आए हैं. इनमें 254 मरीज मिक्स मलेरिया से संक्रमित पाए गए हैं. विभाग ने इस दौरान 6.63 लाख से अधिक लोगों के ब्लड सैंपल की जांच भी की है. इसके बावजूद मरीजों की बढ़ती संख्या चिंता का विषय बनी हुई है.
क्या कहते हैं आंकड़े
जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा 3,173 मरीज बीजापुर में मिले हैं. इसके बाद सुकमा में 1,686, दंतेवाड़ा में 1,344, नारायणपुर में 896, बस्तर में 809, कोंडागांव में 329 और कांकेर में 189 मलेरिया के मरीज सामने आए हैं.
कब होता है मिक्स मलेरिया?
मिक्स मलेरिया तब होता है, जब संक्रमित एनोफिलीज मच्छर के काटने से दोनों प्रकार के परजीवी एक साथ शरीर में प्रवेश कर जाते हैं. इसके पीछे कई कारण हैं. घरों के आसपास पानी जमा होना, समय पर मच्छरों के लार्वा का खत्म नहीं होना, फॉगिंग और कीटनाशक छिड़काव का असर न होना तथा मच्छरदानियों का कम इस्तेमाल इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं.
डॉक्टरों ने बताए लक्षण
डॉक्टरों के अनुसार, मिक्स मलेरिया में मरीज को तेज बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, उल्टी, ज्यादा कमजोरी और खून की कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. कई बार बुखार बार-बार लौटकर आता है. इस गंभीर स्थिति में यह बीमारी दिमाग, किडनी और लीवर पर भी असर कर सकती है. पी. फाल्सीपेरम गंभीर कॉम्प्लिकेशन पैदा करता है, जबकि पी. विवैक्स दोबारा संक्रमण का खतरा बढ़ा देता है.
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि घर के आसपास पानी जमा न होने दें, मच्छरदानी का रेगुलर इस्तेमाल करें और बुखार आने पर तुरंत जांच कराकर समय पर इलाज शुरू करें.

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