छत्तीसगढ़

4. शिक्षकों से करोड़ों की ठगी करने वाले रैकेट के 5 आरोपी गिरफ्तार

कोंडागांव ।  छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में एक बड़े लोन धोखाधड़ी रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इस शातिर गिरोह ने मिलकर 43 सरकारी स्कूल शिक्षकों से करीब 10 से 12 करोड़ रुपये की ठगी की वारदात को अंजाम दिया था. पुलिस ने तीन महीने की सघन जांच के बाद आरोपियों को प्रदेश के अंबिकापुर, जशपुर और सारंगढ़ जिलों से दबोचा है.

पकड़े गए आरोपियों की पहचान शिवशंकर दास (40), दिलीप कुमार सोनी (45), वीरेंद्र तिर्की (44), श्यामसुंदर जांगड़े (33) और अंशुमान सिंह (28) के रूप में हुई है. फरसगांव और केशकाल पुलिस की संयुक्त टीम ने तकनीकी सर्विलांस और बैंक दस्तावेजों की मदद से इस पूरे रैकेट को बेनकाब किया है.

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह गिरोह सीधे-साधे शिक्षकों को विभिन्न बैंकों से एक साथ कई पर्सनल लोन दिलाने का झांसा देता था. आरोपी शिक्षकों से कहते थे कि स्वीकृत लोन राशि का 40 प्रतिशत हिस्सा शिक्षकों को मिलेगा, जबकि शेष 60 प्रतिशत हिस्सा आरोपी खुद रखेंगे. इसके बदले आरोपी उन्हें भरोसा दिलाते थे कि लोन की पूरी ईएमआई (EMI) का भुगतान वे स्वयं दो से तीन वर्षों के भीतर कर देंगे.

लोन पास कराने के लिए आरोपियों ने शिक्षकों के असली वेतन पर्ची, आधार कार्ड और पैन कार्ड जैसे दस्तावेजों का इस्तेमाल किया. हद तो तब हो गई जब आरोपियों ने ज्यादा से ज्यादा बैंकों से लोन उठाने के लिए कुछ मामलों में पते बदलकर फर्जी आधार कार्ड भी तैयार किए और एक ही समय में कई बैंकों में लोन के लिए आवेदन कर दिया.

जब शिक्षकों को ठगी का अहसास हुआ, तो फरसगांव, बड़ेडोंगर, केशकाल और आसपास के इलाकों के पीड़ित शिक्षकों ने मामले की शिकायत दर्ज कराई. इसके बाद फरसगांव और केशकाल थानों में चार अलग-अलग प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गईं.

मामले की गंभीरता को देखते हुए कोंडागांव पुलिस अधीक्षक पंकज चंद्रा के मार्गदर्शन में एक विशेष जांच दल का गठन किया गया था. एसडीओपी अभिनव उपाध्याय और अरुण नेताम के नेतृत्व में इस टीम ने बैंक खातों, लोन के दस्तावेजों और पैसों के लेनदेन का बारीकी से विश्लेषण किया. तकनीकी निगरानी के जरिए पुलिस आखिरकार आरोपियों तक पहुंचने में कामयाब रही.

पुलिस ने आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, लैपटॉप, डेस्कटॉप कंप्यूटर, बैंक पासबुक, चेक बुक, एटीएम कार्ड, डायरी और कई रजिस्टर जब्त किए हैं. आशंका जताई जा रही है कि यह गिरोह पिछले कई सालों से जिले के अलग-अलग हिस्सों में शिक्षकों को अपना शिकार बना रहा था. फिलहाल पुलिस इस रैकेट से जुड़े अन्य संदिग्धों और बैंक लोन एजेंटों की भूमिका की जांच कर रही है.

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