Theresian Academy विवादों में, बकाया फीस को लेकर छात्राओं को कक्षा में नहीं बैठाने का आरोप

रायपुर। राजधानी रायपुर के बोरिया खुर्द स्थित Theresian Academy Private School को लेकर एक विवाद सामने आया है। स्कूल में कक्षा 10वीं की छात्रा अनाम फातिमा एवं कक्षा 8वीं की छात्रा अनाविका फातिमा के पिता खालिद सैफुल्लाह ने स्कूल प्रबंधन पर बच्चों को कथित रूप से मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और फीस बकाया होने के कारण कक्षा में बैठने से रोकने का आरोप लगाया है।
पालक का आरोप
खालिद सैफुल्लाह का कहना है कि उनकी दोनों बेटियां नर्सरी कक्षा से इसी स्कूल में अध्ययनरत हैं और वर्षों से नियमित रूप से फीस जमा की जाती रही है। उनके अनुसार वर्तमान सत्र की अंतिम किस्त के रूप में लगभग 20 हजार रुपये का भुगतान शेष है, जिसे आर्थिक परिस्थितियों के कारण वे समय पर जमा नहीं कर पाए।

पालक का आरोप है कि जब बच्चे स्कूल पहुंचे तो उन्हें यह कहते हुए कक्षा में बैठने नहीं दिया गया कि जब तक फीस जमा नहीं होगी, तब तक उन्हें नियमित कक्षाओं में शामिल नहीं किया जाएगा। आरोप है कि दोनों छात्राओं को पूरे दिन लाइब्रेरी में बैठाकर रखा गया, जिससे वे मानसिक रूप से परेशान हुईं।
खालिद सैफुल्लाह का कहना है कि उन्होंने स्कूल की प्राचार्य से समय देने की मांग करते हुए आर्थिक स्थिति में सुधार होने पर बकाया फीस जमा करने का आश्वासन दिया था, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। उनका दावा है कि उन्होंने परिचित लोगों, जनप्रतिनिधियों तथा क्षेत्रीय विधायक के पुत्र के माध्यम से भी अनुरोध कराया, फिर भी कोई राहत नहीं मिली।
प्राचार्य पर गंभीर टिप्पणी का आरोप
पालक का आरोप है कि बातचीत के दौरान स्कूल प्रबंधन की ओर से यह कहा गया कि बिना फीस जमा किए बच्चों को कक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी। पालक ने यह भी दावा किया कि प्राचार्य ने कथित रूप से कहा कि चाहे किसी भी स्तर से सिफारिश कराई जाए, फीस जमा हुए बिना बच्चों को कक्षा में नहीं बैठाया जाएगा।
स्कूल प्रबंधन का पक्ष
मामले में जब मीडिया टीम ने स्कूल प्रबंधन का पक्ष जानने का प्रयास किया तो स्कूल के एक स्टाफ सदस्य ने बताया कि बच्चों के साथ किसी प्रकार का दुर्व्यवहार नहीं किया गया है। उनका कहना था कि पालक को कई बार बकाया फीस जमा करने के लिए अनुरोध किया जा चुका है, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। स्कूल प्रबंधन के अनुसार फीस भुगतान को लेकर पहले भी देरी की स्थिति बनती रही है।
उठ रहे हैं कई सवाल
इस मामले के सामने आने के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि किसी छात्र की फीस बकाया है, तो क्या उसे नियमित कक्षा से अलग रखना उचित है? क्या इससे बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है? और यदि बच्चों को कथित रूप से कक्षा में बैठने से रोका गया है, तो क्या यह मामला बाल अधिकारों और छात्र हितों से जुड़ा विषय बन सकता है?
जांच और कार्रवाई की मांग
पालक ने मामले की जांच की मांग करते हुए कहा है कि बच्चों को फीस विवाद का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। वहीं स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो क्या संबंधित शिक्षा अधिकारियों अथवा बाल संरक्षण से जुड़े विभागों द्वारा मामले की जांच की जाएगी।
फिलहाल मामला आरोप और प्रत्यारोप के बीच है तथा दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र जांच होना बाकी है। इस प्रकरण में बाल संरक्षण विभाग, शिक्षा विभाग अथवा अन्य सक्षम अधिकारियों द्वारा की जाने वाली कार्रवाई और जांच से जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी हम अपने पाठकों तक पहुंचाते रहेंगे। इस मामले से संबंधित अगली कड़ी और संभावित कार्रवाई की विस्तृत जानकारी आगामी अंक में प्रकाशित की जाएगी।



