अवैध खनन पर “जीरो टॉलरेंस” के निर्देश, लेकिन जमीनी हकीकत पर उठे सवाल

रायपुर। राज्य सरकार द्वारा अवैध खनन के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की सख्त नीति अपनाने के निर्देश दिए गए हैं। इसी क्रम में खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद ने हाल ही में एक वर्चुअल बैठक लेकर अधिकारियों को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। बैठक में स्पष्ट चेतावनी दी गई कि अवैध खनन पर तुरंत प्रभावी कार्रवाई की जाए, अन्यथा संबंधित कलेक्टरों और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
मुख्य सचिव के निर्देशों का स्वागत करते हुए परमानंद जांगड़े ने उम्मीद जताई है कि उच्च अधिकारियों के आदेशों के बाद अब जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई देखने को मिलेगी।
हालांकि, आरंग-अभनपुर क्षेत्र के चिखली, कुरूद और हरदीडीह रेत घाटों की स्थिति इन दावों के विपरीत नजर आ रही है। स्थानीय स्तर पर आरोप है कि यहां “जीरो टॉलरेंस” के बजाय “निरंतर टॉलरेंस” जारी है। लगातार शिकायतों के बावजूद विभाग और प्रशासन की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं होने से सवाल खड़े हो रहे हैं।

जानकारी के अनुसार इन घाटों में स्वीकृत सीमा से बाहर खनन, प्रतिबंधित समय में रातभर उत्खनन और भारी मशीनों का खुलेआम उपयोग किया जा रहा है। साथ ही बिना रॉयल्टी लाखों ट्रकों में रेत भंडारण के आरोप भी सामने आए हैं, जो नियमों की अनदेखी को दर्शाते हैं।
गौरतलब है कि पहले इन घाटों पर सीलिंग की कार्रवाई भी की जा चुकी है, लेकिन उसके बावजूद दोबारा खनन शुरू हो जाना कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद विभागीय चुप्पी बनी हुई है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या “सख्त निर्देश” केवल फाइलों तक सीमित रहेंगे या धरातल पर भी नजर आएंगे।
इसी मुद्दे को लेकर व्यंग्यात्मक रूप से यह भी कहा जा रहा है कि अधिकारियों की “याददाश्त दुरुस्त” करने के लिए बादाम भेंट करने की पहल की जाएगी, ताकि चिखली, कुरूद और हरदीडीह की फाइलें फिर से सक्रिय हो सकें।
साथ ही सचिव स्तर पर मुलाकात कर रायपुर खनिज टीम की कार्यप्रणाली पर जवाबदेही तय करने की मांग भी उठाई जा रही है। अब देखना यह होगा कि सरकार के सख्त निर्देशों का वास्तविक असर जमीनी स्तर पर कब तक दिखाई देता है।



