रायपुर नगर निगम में भेदभाव के आरोप तेज, जोन क्रमांक 10 पर उठे गंभीर सवाल—अमोरा पार्क को आखिरी नोटिस कब?

रायपुर। शहर के प्रशासनिक ढांचे पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। रायपुर नगर निगम के जोन क्रमांक 10 की कार्यप्रणाली को लेकर आम जनता में नाराज़गी बढ़ती जा रही है। आरोप है कि कार्रवाई के मामले में निगम का रवैया पक्षपातपूर्ण हो गया है—जहां गरीबों पर सख्ती दिखाई जाती है, वहीं प्रभावशाली और संपन्न लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने में अधिकारी पीछे हटते नजर आते हैं।
सूत्रों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि निगम आयुक्त विश्व दीप का ध्यान मुख्य रूप से शहर में ठेले-गुमटियां चलाने वाले छोटे व्यापारियों और सड़क किनारे काम करने वाले लोगों पर केंद्रित है। लगातार छापामार कार्रवाई के चलते गरीब वर्ग में असंतोष बढ़ रहा है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग पर भी सफाई के नाम पर अवैध वसूली के आरोप लग रहे हैं।

इसके विपरीत, जोन क्रमांक 10 में बड़े स्तर पर अवैध निर्माण, बिना अनुमति के व्यावसायिक गतिविधियां और जमीनों की खरीद-बिक्री खुलेआम जारी होने की बात सामने आ रही है। स्थानीय लोगों का दावा है कि करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, लेकिन इन मामलों में निगम की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही।
इसी बीच जोन क्षेत्र में स्थित अमोरा पार्क को लेकर भी बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि यहां कथित रूप से नियमों के उल्लंघन के मामले लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन अब तक कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई। सबसे बड़ा सवाल यही है—अमोरा पार्क को आखिरी नोटिस आखिर कब जारी किया जाएगा?
क्या इस मामले में भी प्रशासन किसी दबाव में है, या फिर कार्रवाई को जानबूझकर टाला जा रहा है?
इस पूरे मामले में महापौर मीनल चौबे की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। यह चर्चा जोरों पर है कि क्या उन्हें इन गतिविधियों की जानकारी नहीं है, या फिर अधिकारियों द्वारा जानबूझकर जानकारी उनसे छिपाई जा रही है। लगातार मीडिया रिपोर्ट्स सामने आने के बावजूद ठोस कार्रवाई का अभाव स्थिति को और गंभीर बना रहा है।
शहर की जनता अब यह सवाल कर रही है कि क्या निगम की कार्रवाई केवल गरीबों तक ही सीमित रह गई है? क्या प्रभावशाली लोगों को संरक्षण दिया जा रहा है? और सबसे अहम—जोन क्रमांक 10 के भीतर आखिर ऐसा क्या “अंदरखाने खेल” चल रहा है, जो प्रशासन की नजरों से बचा हुआ है?
इन तमाम सवालों के बीच यह स्पष्ट है कि यदि जल्द ही निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो प्रशासन की साख पर गहरा असर पड़ सकता है। जनता अब जवाब और पारदर्शिता दोनों की मांग कर रही है।



