छत्तीसगढ़

3. निर्यात ठप होने से फलों के दाम गिरे, छत्तीसगढ़ के किसानों को 450 करोड़ का नुकसान

छत्तीसगढ़ के फल उत्पादक इन दिनों बड़े आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय हालात, खासकर अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते फलों का निर्यात पूरी तरह प्रभावित हो गया है। इसका सीधा असर दुर्ग, भिलाई और रायपुर की फल मंडियों में देखने को मिल रहा है, जहां फलों के दाम अचानक गिर गए हैं।

स्थानीय मंडियों में फंसा माल, करोड़ों का नुकसान

पहले जो फल मुंबई और विशाखापत्तनम के जरिए संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और ओमान जैसे देशों में भेजे जाते थे, अब वे स्थानीय बाजारों में ही अटके हुए हैं। निर्यात ठप होने से किसानों को लगभग 450 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान झेलना पड़ रहा है।

हजारों एकड़ में हुई थी खेती, अब नहीं मिल रहा सही दाम

इस सीजन में राज्य के कई जिलों में बड़े पैमाने पर तरबूज और खरबूज की खेती की गई थी। करीब 10 से 15 हजार एकड़ क्षेत्र में उत्पादन हुआ, जिसमें दुर्ग, बालोद, रायपुर, राजनांदगांव, बेमेतरा, गरियाबंद, महासमुंद, बलौदाबाजार, जांजगीर-चांपा और सारंगढ़ शामिल हैं। लेकिन बाजार की कमी के कारण किसानों को उचित कीमत नहीं मिल पा रही है।

केले की कीमतों में भारी गिरावट

केला उत्पादकों की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। दुर्ग जिले के किसानों के अनुसार, जहां पिछले साल केले का थोक भाव 30 से 40 रुपये प्रति किलो था, वहीं इस बार यह घटकर 8 से 12 रुपये प्रति किलो तक आ गया है।

हर साल ईरान, दुबई, कतर और ओमान जैसे देशों में बड़ी मात्रा में केला भेजा जाता था, लेकिन इस बार कमीशन एजेंटों की अनुपस्थिति के चलते निर्यात पूरी तरह प्रभावित है और किसानों को मजबूरन स्थानीय बाजार में ही बिक्री करनी पड़ रही है।

किसानों की बढ़ी चिंता, समाधान की तलाश

लगातार गिरती कीमतों और निर्यात बंद होने से किसानों की आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ा है। किसान अब सरकार से मदद और निर्यात व्यवस्था को बहाल करने की मांग कर रहे हैं, ताकि उन्हें राहत मिल सके।

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