रायपुर में मिलावटी पेय पदार्थों पर कार्रवाई तेज, लेकिन जार पानी कारोबार पर सवाल!

रायपुर। गर्मी के मौसम में आम जनता की सेहत को ध्यान में रखते हुए खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा जिले में विशेष जांच अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत अधिकारियों की टीम लगातार दुकानों, होटलों और उत्पादन इकाइयों का निरीक्षण कर रही है तथा संदिग्ध उत्पादों के नमूने एकत्र कर जांच के लिए भेजे जा रहे हैं।
अभियान के दौरान भाठागांव स्थित एक्वा यूनिट से पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर के दो नमूने लिए गए। इसके अलावा अग्रसेन चौक और अवंति विहार क्षेत्र की कुछ अन्य फर्मों से भी पानी के नमूने संग्रहित किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि सभी नमूनों को राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजा गया है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन फर्मों के उत्पादों में खामियां पाई जाएंगी, उन्हें सुधार के लिए नोटिस जारी किया जाएगा। वहीं, यदि कोई उत्पाद असुरक्षित या अमानक पाया जाता है, तो संबंधित फर्म के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जार पानी के कारोबार पर उठ रहे सवाल
हालांकि इस अभियान के बीच एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि शहर में बड़ी संख्या में चल रही जार (20 लीटर केन) पानी सप्लाई करने वाली इकाइयों पर अपेक्षित कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है। कई स्थानीय स्तर की फैक्ट्रियों में बिना मानक प्रक्रिया के पानी भरकर सीधे बाजार में सप्लाई किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, कई यूनिट्स में न तो पानी का नियमित परीक्षण होता है और न ही स्वच्छता के मानकों का पालन किया जाता है। कुछ मामलों में तो साधारण नल या बोरवेल के पानी को फिल्टर का नाम देकर जार में भरकर सप्लाई किया जा रहा है। इसके बावजूद इन इकाइयों पर निगरानी और कार्रवाई सीमित नजर आती है।
स्थानीय लोगों और उपभोक्ताओं का कहना है कि पैकेज्ड बोतलबंद पानी की तुलना में जार पानी का उपयोग अधिक होता है, खासकर होटलों, दफ्तरों और घरों में। ऐसे में यदि इसकी गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह गंभीर स्वास्थ्य जोखिम बन सकता है।
प्रशासन से जवाबदेही की मांग
विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरह पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर पर सख्ती दिखाई जा रही है, उसी तरह जार पानी सप्लाई करने वाली इकाइयों की भी नियमित जांच जरूरी है। इसके लिए लाइसेंस, पानी की गुणवत्ता, मशीनरी और साफ-सफाई के मानकों की जांच अनिवार्य की जानी चाहिए।
खाद्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जार पानी यूनिट्स को भी अभियान के दायरे में लाया जा रहा है और जल्द ही इस दिशा में विशेष कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष
जहां एक ओर प्रशासन की कार्रवाई सराहनीय है, वहीं दूसरी ओर जार पानी के अनियंत्रित कारोबार पर नियंत्रण जरूरी है। यदि इस पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो आम जनता की सेहत के साथ बड़ा खिलवाड़ हो सकता है।



