लाइफस्टाइल

7. LPG सिलेंडर या इंडक्शन: रसोई के बजट पर कौन पड़ेगा भारी? जानें आपके लिए क्या है सबसे सस्ता और बेहतर ऑप्शन

रसोई गैस की बढ़ती कीमतें और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की अस्थिरता ने आम आदमी को विकल्प तलाशने पर मजबूर कर दिया है।

वर्तमान में पश्चिम एशिया के हालातों के कारण एलपीजी (LPG) की सप्लाई और कीमतों पर पड़ने वाले असर के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। क्या हमें गैस सिलेंडर छोड़कर इंडक्शन (Induction) पर शिफ्ट हो जाना चाहिए?

1. एनर्जी एफिशिएंसी – कौन करता है ऊर्जा की बचत?

गैस चूल्हे और इंडक्शन के बीच सबसे बड़ा मुकाबला ‘ऊर्जा की बर्बादी’ को लेकर है।

गैस चूल्हा – जब आप गैस जलाते हैं, तो उसकी लौ का लगभग 60% हिस्सा आसपास की हवा में बेकार चला जाता है। यानी आप जिस गैस के पैसे देते हैं, उसका केवल 40% ही खाना पकाने में इस्तेमाल होता है।

इंडक्शन कुकटॉप – यह 90% तक एफिशिएंट होता है। इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तकनीक के कारण यह सीधे बर्तन को गर्म करता है, जिससे ऊर्जा की बर्बादी न के बराबर होती है।

2. लागत का गणित – 1000 का सिलेंडर बनाम बिजली का बिल

अगर हम खर्च की तुलना करें, तो आंकड़े चौंकाने वाले हैं-

एक एलपीजी सिलेंडर जितनी ऊर्जा पैदा करने के लिए इंडक्शन लगभग 78 यूनिट बिजली की खपत करता है। औसत बिजली दर (8-9 प्रति यूनिट) के हिसाब से महीने भर का खर्च 600 से 700 के बीच आता है।

वहीं, एक गैर-सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत कई राज्यों में 800 से 1000 के पार है। इस लिहाज से इंडक्शन का उपयोग आपके मासिक बजट को 25-30% तक कम कर सकता है।

3. शुरुआती निवेश

इंडक्शन पर शिफ्ट होने के लिए आपको एकमुश्त खर्च करना होगा-

कुकटॉप – एक अच्छी क्वालिटी का इंडक्शन 2,000 से 4,000 में मिल जाता है।

बर्तन – इंडक्शन के लिए फ्लैट बॉटम वाले स्टेनलेस स्टील या कास्ट आयरन के बर्तनों की जरूरत होती है। यदि आपके पास पुराने एल्युमीनियम के बर्तन हैं, तो आपको नए बर्तन खरीदने पड़ सकते हैं।

क्यों है इंडक्शन एक स्मार्ट चॉइस?

भले ही बर्तनों पर आपको शुरुआत में थोड़ा निवेश करना पड़े, लेकिन बिजली की कम खपत के कारण एक सामान्य परिवार एक साल के भीतर अपनी लागत वसूल कर लेता है। इसके अलावा, इंडक्शन के साथ आपकी रसोई ठंडी रहती है, आग लगने का खतरा कम होता है और इसे साफ करना भी बेहद आसान है।

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