भारत की जीडीपी वृद्धि दर, सुखबोध का अंत इसी तरह गहरी निराशा में होता रहेगा?
जब सुर्खियां ही सियासी किस्मत तय कर रही हों, तब आपदा में भी अवसर ढूंढ कर उस पर खुशी बांटने की प्रवृत्ति समझी जा सकती है। बहरहाल, हकीकत इतनी गंभीर है कि यह उत्सव मनाने का अवसर भी नहीं मिला।

एम. डी. आरिफ की कलम से…..
रायपुर। भारतीय रिजर्व बैंक ने अनुमान लगाया था कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 16.2 प्रतिशत रहेगी। बाजार के तमाम पंडितों का भी अनुमान था कि ये दर 15 से 16 प्रतिशत तक रहेगी। इसके आधार पर उत्सव मनाने की पूरी तैयारी थी। हालांकि निम्न आधार अगर ये अनुमान सही भी साबित होते, तो उसमें उत्सव मनाने जैसा शायद ही कुछ था। इसलिए कि उसका मतलब होता कि 2018-19 के बाद के तीन वर्षों में इस तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था ने लगभग 1.75 प्रतिशत की औसत वृद्धि दर हासिल की है। जिस दौर में सुर्खियां ही सियासी किस्मत तय कर रही हों, तब आपदा में भी अवसर ढूंढ कर उस पर खुशी बांटने की प्रवृत्ति सहज समझी जा सकती है। बहरहाल, हकीकत इतनी गंभीर है कि यह उत्सव मनाने का अवसर भी सरकार और उसकी छवि सुधारने में जुटे रहने वाले मीडिया के हिस्से को नहीं मिला।

असल आंकड़े ये सामने आए कि वृद्धि दर 13.5 प्रतिशत रही। इसके बाद गुलाबी (वित्तीय) अखबारों को यह सुर्खी बनानी पड़ी कि आंकड़े कमजोर हैँ। ऊपर से यह भी यह सामने आ गया कि जुलाई में कोर सेक्टर की वृद्धि दर छह महीनों के सबसे निचले स्तर पर गिर 4.5 प्रतिशत ही दर्ज हुई।
जो जीडीपी वृद्धि दर सामने आई, उसमें यह पहलू गौरतलब है कि पहली तिमाही में आयात साढ़े छह प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज हुई, जिसका जीडीपी वृद्धि दर को ऊंचा करने में महत्त्वपूर्ण योगदान रहा। जबकि निर्यात में सिर्फ 0.2 प्रतिशत वृद्धि दर्ज हुई। यह किसी भी रूप में स्वस्थ अर्थव्यवस्था का सूचक नहीं है। बल्कि बढ़ता व्यापार घाटा हर लिहाज से गहरी चिंता का विषय है। इसका दबाव विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहा है। महंगे आयात का महंगाई में बढ़ाने में योगदान सर्वविदित है। तो अब जरूरत इस बात की है कि अर्थव्यवस्था की बुनियादी समस्याओं पर खुल कर बात हो। जड़ें कहां कमजोर हुई है, इसे समझने की कोशिश की जाए। ऐसा तभी हो सकता है, जब सिर्फ सकारात्मक खबरें ढूंढने और प्रचारित करने की प्रवृत्ति से सरकार उबरे। वरना, हर सुखबोध का अंत इसी तरह गहरी निराशा में होता रहेगा।



