छत्तीसगढ़

9. जरा संभलकर! तोता, मैना, कछुआ पालने पर हो सकती है जेल, बचना है तो जान लीजिए ये नया नियम

तोता, लंगूर, बंदर, कछुआ, गिलहरी, मैना सहित अन्य प्रजाति के वन्य प्राणी पालने वालों की वन विभाग के एक आदेश ने मुसीबत बढ़ा दी है। ऐसा करते पाए जाने पर दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी जारी की गई है।

धमतरी जिले की बात करें तो यहां हर 15 से 20 घरों के बीच एक-दो पालतू तोता मिल जाएंगे। कुछ वार्डों में तो घर-घर तोते पाले गए हैं। बंधक बनाकर तोता सहित अन्य वन्य प्राणियों को पालना, खरीदी-बिक्री करना अपराध की श्रेणी में आता है। मंगलवार को वन विभाग ने उक्त वन्य प्राणियों को पालने वाले लोगों से नजदीकी वनाधिकार कार्यालय में जमा करने कहा है। इसके लिए 31 अगस्त 2024 तक का समय दिया गया है।

तीन साल की होगी सजा

वन मंडलाधिकारी श्रीकृष्ण जाधव ने बताया कि वन्य प्राणी संरक्षक अधिनियम-1972 (संशोधिक अधिनियम मई-2022) के तहत तोता एवं अन्य अनुसूचित पक्षियों की प्रजातियों को जीवित स्थिति में कैद रखना, पालना, मृत अवशेष जैसे नाखून, हड्डी, मांस, बाल आदि रखने या खरीदी बिक्री करना वन अपराध की श्रेणी में आता है।

ऐसे करते पाए जाने पर अपराधी को न्यायालय द्वारा 3 साल या अधिक का कारावास एवं 25 हजार अथवा अधिक का जुर्माना या दोनों से दंडित करने का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि वन्य प्राणी रखने की सूचना या शिकायत टोल फ्री नंबर-1800233700 पर कर सकते हैं। इसके अलावा वन मंडल द्वारा जारी मिस्ड कॉल या व्हाट्सएप मैसेज के माध्यम से 88890-96666 पर दिया जा सकता है। सूचना देने वाले का नाम गोपनीय रखा जाएगा।

दर्द: बच्चों की तरह पाला हैं, जुदा कैसे करें?

इस आदेश के बाद से ज्यादातर तोता पालने वालों में चिंता नजर आ रही। कुछ तोता पालने वालों ने कहा कि वे पिछले 10-12 वर्षों से घर के बच्चे की तरह तोता पाल रहे हैं। बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक तोता से जुड़े हैं। भोजन के समय भी साथ बैठकर तोता भी भोजन करता है। अचानक अब मीडिया के माध्यम से जानकारी हो रही कि यह अपराध की श्रेणी में आ रहा है। प्राय: हर तोता पालने वाले का तोता से मार्मिक जुड़ाव रहता है। ऐसी स्थिति में तोता को परिवार से जुदा करना बड़े मुश्किल का काम है।

उड़ने लायक नहीं, तो जू-पार्क में रखेंगे

डीएफओ श्रीकृष्ण जाधव ने कहा कि तोता सहित अन्य वन्य प्राणियों को कैद कर रखना अपराध की श्रेणी में आता है। पहले तोता पालकों को खुद से जमा करने की अपील कर रहे हैं। बाद में कार्रवाई भी संभावित है। उड़ने लायक तोते को आजाद करेंगे। वहीं उड़ नहीं पाने वाले तोते को जूं-पार्क भेजेंगे। साथ ही ट्रीटमेंट के लायक तोते का इलाज भी कराएंगे।

वन विभाग की चेतावनी का दिखने लगा असर, 55 तोते हुए आजाद, पिंजरे में रखने वालों के खिलाफ हो रही कार्रवाई…

वन विभाग की चेतावनी का असर दिखने लगा है। लोग अब घर पर पाले गए तोते को विभाग के सुपुर्द करने लगे। रविवार को 55 तोते कानन जू को दिया गया, जिन्हें जू प्रबंधन ने क्वारंटाइन सेंटर में रखा है। लेकिन सभी तोते स्वस्थ हैं।

इसलिए उच्चाधिकारियों से अनुमति लेकर आधी-आधी संख्या में अचानकमार टाइगर रिजर्व में छोड़ा जाएगा। तोते या अन्य पक्षियों को पिंजरे में कैद करना अपराध है। यह प्राविधान तो पहले से था। लेकिन, विभाग इस पर कभी गंभीर नहीं दिखा। यहीं कारण इन्हें पाल रहे थे। इतना ही नहीं पक्षियों की खरीदी- बिक्री का धंधा में धड़ल्ले से चल रहा था।
इसके बाद भी विभाग ने सख्ती नहीं दिखाई। लेकिन, अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय व स्थानीय संस्थाओं व पक्षी प्रेमियों ने जब इस पर आपत्ति जताई और नाराजगी भी जाहिर की। इसके बाद विभाग होश में आया। 23 अगस्त को अपर प्रधान मुख्य वनसंरक्षक ने सभी सीसीएफ को पत्र जारी कर तोते व अन्य पक्षियों की बिक्री व पालने वालों पर सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया। इस आदेश के बाद वनमंडल और यहां से वन परिक्षेत्र कार्यालय को जांच व कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। बिक्री करने वालों पर तो तत्काल कार्रवाई होगी।

जू में छोड़ने एक सप्ताह की मिली मोहलत

जिन्होंने तोते पाले हैं, उन्हें कानन पेंडारी जू में छोड़ने के लिए एक सप्ताह की मोहलत दी गई है। इसके बाद विभाग कार्रवाई करेगा। तोता पालकों तक यह संदेश पहुंच चुका है कि आगे विभाग की टीम जांच करेगी। इस दौरान कार्रवाई भी होगी। यही कारण है कि लोग अब कार्रवाई के डर से घर पर पाले गए तोते को लेकर स्वंय कानन पेंडारी जू पहुंच रहे हैं।

55 तोते जू प्रबंधन को सौंपे

सोमवार को तो 55 तोते जू प्रबंधन को सौंपे गए। धीरे-धीरे आंकड़ा बढ़ेगा। जू में वन्य प्राणी चिकित्सक डा. पीके चंदन ने तोते की जांच की। सभी स्वस्थ हैं और जंगल छोड़ने की स्थिति में हैं। प्रबंधन तोते को जल्द छोड़ने की योजना भी बना रहा है। दरअसल क्वारंटाइन सेंटर की क्षमता ज्यादा पक्षियों को रखने की नहीं है।

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