ममता, केजरीवाल क्या करें?
ममता बनर्जी सदमे में हैं। अरविंद केजरीवाल भी परेशान होंगे। कहने को भले उन्होंने कहा हो कि- तुम लोग सावरकर की औलाद हो, जिन्होंने अंग्रेजों से माफी मांगी थी, हम भगत सिंह की औलाद हैं। …हमें जेल और फांसी के फंदे से डर नहीं लगता।

ममता बनर्जी सदमे में हैं। अरविंद केजरीवाल भी परेशान होंगे। कहने को भले उन्होंने कहा हो कि- तुम लोग सावरकर की औलाद हो, जिन्होंने अंग्रेजों से माफी मांगी थी, हम भगत सिंह की औलाद हैं। …हमें जेल और फांसी के फंदे से डर नहीं लगता। हम कई बार जेल होकर आ गए हैं। मगर पहले सत्येंद्र जैन और अब मनीष सिसोदिया पर लटकी तलवार ने केजरीवाल को मन ही मन झिंझोड़ा होगा। ममता और केजरीवाल दोनों की ईमानदारी पर जनता में सवाल पैदा कर दिए हैं। ममता बनर्जी का संकट इसलिए बड़ा है क्योंकि सरकार में नंबर दो हैसियत के पार्थ चटर्जी की करीबी अर्पिता मुख्रर्जी के घर पर छापे में मिली करोड़ों की नकदी के फोटो और वीडियो को बंगाल के भद्र और गरीब जनता भुला नहीं सकती। खुद ममता बनर्जी को नकदी का अंबार देख कर सांप सूंघ गया होगा। उन्होंने सदमे में चुप्पी धार ली और आखिरकार पार्थ चटर्जी को हटाया।
मैंने ममता बनर्जी को सांप सूंघने का जुमला इसलिए इस्तेमाल किया क्योंकि ममता बनर्जी का चरित्र पैसे का भूखा और भ्रष्टाचार में तर-बतर रहने का नहीं है। कुछ भी हो ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल वैसे बेईमान नहीं हैं, जैसा भारत का आम राजनेता है। मेरा अरविंद केजरीवाल से कोई लगाव नहीं है। उलटे उनके द्वारा बाकी सबको बेईमान बताने की राजनीति के खिलाफ लिखा है। दिल्ली सरकार याकि केजरीवाल और मनीष सिसोदिया से ‘नया इंडिया’ को एक पैसे का विज्ञापन नहीं मिला है। बावजूद इसके एनजीओ के वक्त (मैंने ही उन दिनों आरटीआई एक्टिविस्ट केजरीवाल के नाते उनका ‘सेंट्रल हॉल’ में पहला इंटरव्यू किया था।) केजरीवाल की तासीर को जो समझा है तो उसमें मानता हूं कि निजी तौर पर वे पैसे की भूखी प्रवृत्ति के नहीं हैं और यहीं बात भविष्य की पूंजी है। मेरी यहीं धारणा ममता बनर्जी को लेकर है। इसलिए दोनों से भविष्य में नरेंद्र मोदी के आगे खम ठोक चुनौती की संभावना थी।



