राष्ट्रीय

आजाद के बाद अब कांग्रेस के लिए फैसले की घड़ी

पिछले तीन साल से कांग्रेस पार्टी जिस असहज स्थिति को टाल रही थी वह स्थिति आ गई है। अब कांग्रेस को तय करना है कि पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा? कांग्रेस को यह भी तय करना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में उसकी क्या रणनीति होगी?

अब कांग्रेस का पूर्णकालिक अध्यक्ष चुने जाने का समय आ गया है। कांग्रेस की पिछली कार्य समिति की बैठक में तय हुआ था कि 20 अगस्त से 21 सितंबर के बीच अध्यक्ष चुना जाएगा। सो, उम्मीद करनी चाहिए कि 21 सितंबर से पहले पार्टी को नया अध्यक्ष मिल जाएगा। कांग्रेस को जो तीन फैसले करने हैं उनमें सबसे अहम यहीं है कि कौन होगा पार्टी का अध्यक्ष? राहुल गांधी की कमान में कांग्रेस ने 2018 में हुए राज्यों के चुनाव में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था। कर्नाटक में पांच साल की एंटी इन्कंबैंसी के बावजूद कांग्रेस का प्रदर्शन अच्छा था और उसने राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ तीनों राज्यों में जीत हासिल की थी। लेकिन 2019 के चुनाव में कांग्रेस बुरी तरह हारी, जिसके बाद राहुल ने इस्तीफा दे दिया। कह सकते हैं कि चुनावी प्रदर्शन के लिहाज से राहुल की अध्यक्षता में कोई कमी नहीं है। वैसे भी डीफैक्टो अध्यक्ष के रूप में वे ही काम कर रहे हैं। सो, वे अध्यक्ष बन जाएं तो कांग्रेस में पिछले कई सालों से बनी अनिश्चितता खत्म हो जाएगी।

परंतु इसके दूसरे खतरे हैं। भाजपा को यह कहने का मौका मिलेगा कि कांग्रेस में अध्यक्ष पद एक परिवार के लिए आरक्षित है। ध्यान रहे पिछले 24 साल से दो साल के राहुल के कार्यकाल को छोड़ दें तो सोनिया गांधी अध्यक्ष हैं। यानी 24 साल से दो लोग अध्यक्ष हैं, जबकि भाजपा में इन 24 सालों में नौ अध्यक्ष बने हैं। इससे यह संदेश जाता है कि भाजपा में कोई भी अध्यक्ष बन सकता है, जबकि कांग्रेस में ऐसा नहीं है। इस धारणा को तोड़ने के लिए नेहरू-गांधी परिवार की जगह किसी दूसरे नेता को अध्यक्ष बनाया जा सकता है। इसका पहला फायदा ये है कि कम से कम सैद्धांतिक रूप से यह कहने का मौका मिलेगा कि कांग्रेस एक परिवार की पार्टी नहीं है। दूसरे, राहुल गांधी के ऊपर से फोकस हटेगा। अभी सत्तारूढ़ भाजपा के हमले का एकमात्र निशाना राहुल हैं, जबकि किसी और को अध्यक्ष बनाने पर एक दूसरा चेहरा भी मिलेगा, जिस पर हमले होंगे। फोकस हटने के बाद राहुल संगठन और प्रचार के काम पर बेहतर ध्यान दे पाएंगे। एक फायदा यह भी हो सकता है कि मीडिया उनको प्रधानमंत्री पद का दावेदार बनाना बंद करे। अगर नहीं बंद करे तो उनको आगे बढ़ कर यह ऐलान करना चाहिए कि वे किसी हाल में पीएम पद की रेस में नहीं हैं।

Related Articles

Back to top button