छत्तीसगढ़
8. Fungal Infections: बारिश में इन अंगों में हो सकता है फंगल इन्फेक्शन, ये रखें सावधानी

बारिश के मौसम में फंगल इन्फेक्शन का खतरा अधिक होता है, क्योंकि नम और ठंडे मौसम में फंगस के फैलने के लिए अनुकूल वातावरण होता है। फंगल इन्फेक्शन शरीर के किसी भी अंग में हो सकता है, लेकिन आमतौर पर सबसे ज्यादा फंगल इन्फेक्शन त्वचा, नाखून, कान, पैर, गुप्तांगों में होता है और इस दौरान विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। यहां इंदौर स्थित अष्टांग आयुर्वेद कॉलेज के डॉक्टर अखिलेश भार्गव इस बारे में विस्तार से जानकारी दे रहे हैं –
एथलीट फुट (टीनिया पेडिस)
बारिश के मौसम में यह एक आम फंगल इन्फेक्शन है, जो पैरों की त्वचा को प्रभावित करता है। पैरों की उंगलियों के बीच घाव हो जाता है और नम वातावरण में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है।
नेल फंगस
नाखूनों में फंगल संक्रमण होना नेल फंगस कहलाता है। बारिश के मौसम में यह समस्या आमतौर पर पैर के नाखूनों में होती है। इस कारण से पैर के नाखून टूटने लगते हैं।
कैंडिडिआसिस
कैंडिडिआसिस कैंडिडा फंगस के कारण होता है। इसमें मुंह, जननांग क्षेत्र और त्वचा की परत प्रभावित होती है। बहुत ज्यादा खुजली के कारण मरीज परेशान हो जाता है। बच्चों के प्रति विशेष सावधानी बरतें।
रिंगवॉर्म (टीनिया कॉर्पोरिस)
रिंगवॉर्म को दाद के नाम से भी जाना जाता है। इस कारण त्वचा पर गोलाकार और लाल धब्बे हो जाते हैं, जिसमें बहुत ज्यादा खुजली होने लगती है। संक्रामक होने के कारण यह परिवार के अन्य सदस्यों में भी फैल सकता है।
जॉक इच (टीनिया क्रूरिस)
यह फंगल संक्रमण कमर के आसपास, भीतरी जांघों और हिप्स में होता है। बहुत अधिक खुजली होने के कारण त्वचा पर लालिमा और दाने हो जाते हैं।
कान व आंख में फंगल इन्फेक्शन
बारिश के मौसम में अधिकांश लोगों में कान बंद होने की समस्या देखी जाती है। दरअसल, कान में फंगल इन्फेक्शन के कारण कान का पर्दा बंद हो जाता है और सुनाई देने में परेशानी होती है। वहीं, बारिश में फंगल इन्फेक्शन आंख के कॉर्निया को प्रभावित करता है। ऐसी परिस्थिति में तत्काल इलाज न कराने पर विजन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।



