छत्तीसगढ़

5. अध्ययन: बीमारियों की सही पहचान न होने के कारण हर साल 10 लाख से अधिक की जाती है जान, इस रोग के मामले सबसे अधिक

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वैश्विक स्तर पर बढ़ती कई प्रकार की बीमारियों के कारण होने वाली जटिलताओं के जोखिमों को कम किया जा सकता है, यदि उनका समय पर निदान और इलाज हो जाए। एक अनुमान के मुताबिक अमेरिका में हर साल बीमारियों के गलत निदान के कारण 7.95 लाख से अधिक लोग या तो मार जाते हैं या स्थायी रूप से विकलांग्ता के शिकार हो जाते हैं। कैंसर जैसी बीमारियों की गंभीरता के लिए भी समस्या का सही तरीके से निदान न हो पाना एक कारण माना जाता रहा है।

डॉक्टर्स बताते हैं, गलत तरीके से निदान की जाने वाली चिकित्सीय समस्याओं की सूची में स्ट्रोक सबसे ऊपर है, इसके कारण जानलेवा स्वास्थ्य समस्या होने और कुछ स्थितियों में रोगी की जान जाने का भी खतरा अधिक हो सकता है। ऐसे लगभग 4 में से 3 लोगों में दिल का दौरा, संक्रमण या कैंसर जैसी हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा अधिक हो सकता है।

गलत निदान हो सकता है खतरनाक

समस्या का सही निदान न हो पाना वास्तव में किस प्रकार से हमारे लिए समस्याकारक हो सकता है इसे जानने के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीम ने अध्ययन किया। शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि 11% चिकित्सा समस्याएं, गलत निदान के कारण होती हैं, हालांकि रोग के आधार पर इसकी व्यापकता भिन्न हो सकती है।

सर्वे में पाया गया का दिल के दौरे के लिए गलत निदान दर केवल 1.5% है, हालांकि रीढ़ की हड्डी की समस्या का खतरा 62% हो सकता है।

अध्ययन में क्या पता चला?

बीएमजे क्वालिटी एंड सेफ्टी जर्नल में प्रकाशित इस शोध की रिपोर्ट में कहा गया कि यह रोगी और चिकित्सक दोनों के लिए सोचने का विषय है। सेंटर फॉर डायग्नोस्टिक एक्सीलेंस के निदेशक और शोधकर्ता डेविड न्यूमैन-टोकर कहते हैं, स्ट्रोक, सेप्सिस, निमोनिया और फेफड़ों के कैंसर के लिए नैदानिक त्रुटियों को 50% तक भी अगर कम कर लिया जाए तो स्थाई विकलांगता और मृत्यु के मामलों में प्रतिवर्ष 1.50 लाख तक की कमी आ सकती है।

क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?

विशेषज्ञ कहते हैं, स्ट्रोक के रोगियों में समय रहते समस्या का निदान न हो पाने के मामले सबसे अधिक देखे जाते हैं। यह जानलेवा भी हो सकती है। प्रोफेसर न्यूमैन-टोकर कहते हैं, नैदानिक त्रुटियां हमारे सामने सबसे कम संसाधन वाले सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट है। रोगियों को भी लक्षणों पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है।

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