छत्तीसगढ़

2. गर्भवती के इलाज में लापरवाही व मौत का मामला, हटाई गईं डा. नेहा खेमका, जिला नोडल पर भी होगी कार्रवाई

रायपुर। गुढ़ियारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज में लापरवाही और देरी की वजह गर्भवती व नवजात की मौत मामले जिला स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। लापरवाही को लेकर अस्पताल प्रभारी डाक्टर नेहा खेमका अग्रवाल को पद से हटा दिया गया है। वहीं जिला स्तर पर आ रही शिकायत को देखते हुए मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य की नोडल अधिकारी डाक्टर प्रीति नारायण पर भी कार्रवाई हो सकती है। उक्त जानकारी देते हुए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जच्चा-बच्चा मौत के मामले में जांच टीम बिठाई गई थी, जिसमें अस्पताल की लापरवही सामने आई है।

मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य का बुरा हाल

जिले में मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य का बेहद बुरा हाल है, स्वास्थ्य केंद्रों में महिलाओं को पर्याप्त इलाज ना मिलने, अस्पताल में देरी से इलाज, चिकित्सक ना होने, प्रसूता को आपात स्थिति में सेवाएं ना मिलने की शिकायतें पूरे जिले से आ रही है। स्वास्थ्य केंद्रों में आपात स्थिति में प्रसव महिलाओं के लिए जी का जंजाल बन गया है। कहा जा रहा है विभाग में जूनियर स्तर की डाक्टर को बड़ी जिम्मेदारी मिलने के बाद से अव्यवस्था की शिकायतें आ रही है। इसपर अब सीएमएचओ भी सख्त हो गए हैं, उन्होंने मामले में अधिकारी को फटकार लगाई है।

यह है पूरा मामला

गुढ़ियारी निवासी राधा निर्मलकर नौ जून को दोपहर करीब 12 बजे प्रसव दर्द से तड़पती हुई गुढ़ियारी अस्पताल पहुंची थी। यहां पीड़िता की हालत खराब होती गई व सांस लेने में दिक्कत आने लगी। चिकित्सकों ने बताया कि उसे तुंरत आपरेशन की आवश्यकता थी, लेकिन अस्पताल में एनेस्थेटिस्ट समेत चिकित्सकीय टीम ना होने व व्यवस्था ना होने की वजह से रेफर किया जाना था। स्टाफ ने 108 और 102 एंबुलेंस को संपर्क किया, लेकिन एंबुलेंस नहीं आई। स्थिति बिगड़ते देख स्वजन मरीज को मजबूरी में आटो में भरकर निजी अस्पताल ले गए। जबकि अस्पताल से ही मरीज को हायर सेंटर आंबेडकर अस्पताल या जिला अस्पताल रेफर किया जाना था। देरी की वजह से जच्चा-बच्चा की मौत हो गई। स्वजनाें ने जमकर हंगामा किया।

रायपुर सीएमएचओ डाक्टर मिथलेश चौधरी ने बताया कि लापरवाही पर अस्पताल प्रभारी के उपर कार्रवाई करते हुए उन्हें हटाया गया है। मामले की जांच रिपोर्ट के आधार पर अन्य पर भी कठोर कार्रवाई करेंगे। मातृत्व एवं शिशु स्वस्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के निर्देश दिए गए हैं।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

बता दें कि गर्भवती की हालत बिगड़ती रही, इसके बावजूद पर्याप्त इलाज नहीं मिला। इमरजेंसी में आपरेशन के लिए 108 और 102 एंबुलेंस तक नहीं पहुंचा। गंभीर हालत में गर्भवती को स्वजन आटो में बिठाकर ले गए थे। पूरे मामले को नईदुनिया ने प्रमुखता से उठाया। जिसके बाद मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ने भी रिपोर्ट मांगी है। और ठोस कार्रवाई के निर्देश विभाग को दिए हैं।

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