8. ‘चिकन’ बना एएमआर की वजह, WHO ने माना दुनिया की 10वीं बड़ी बीमारी, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस से मुश्किल हालात

ये सर्दी जुखाम ठीक होने का नाम ही नहीं ले रहा. रह-रह का बुखार वापस आ जाता है. कितनी भी दवाएं खा लें, लेकिन कुछ असर ही नहीं हो रहा… कुछ ऐसी ही बातें आपको गाहे बगाहे सुनने को मिल ही जाती होंगी. आपको पता है इन तमाम बातों की वजह क्या है. मैं अपनी बात शुरू करूं, इससे पहले आप मेरे एक सवाल का जवाब दीजिए. कहीं आपका पसंदीदा भोजन चिकन तो नहीं.
यदि हां, तो थोड़ा सचेत हो जाइए. कहने को प्रोटीन, विटामिन और मिनरल से भरपूर आपका चिकन आपके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कम कर सकता है. इतना ही नहीं, चिकन की वजह से आपके शरीर में एंटीबायोटिक, एंटीवायरल, एंटीफंगल सहित दूसरी जीवन रक्षक दवाओं का असर भी कम हो सकता है. और, इस बात की तस्दीक अब भारत के डॉक्टर्स ही नहीं, बल्कि विश्व स्वास्थ्य संगठन भी कर रहा है.
अब, सवाल यह है कि प्रोटीन, विटामिन और मिनरल भरपूर चिकन हमारी बीमारी की वजह कैसे बन रहा है. तो इसका जवाब है कि आजकल पोल्ट्री फार्म संचालक चिकन को हष्ट-पुष्ट और सेहतमंद बनाने के लिए उसे खाने के साथ जरूरत से ज्यादा एंटीबायोटिक दवाएं देते हैं. समय के साथ, चिकन के शरीर में भारी भात्रा में एंटीबायोटिक इकट्ठा हो जाते हैं और यही हष्ट-पुष्ट दिखने वाले चिकन बिकने के लिए चला जाता है.
दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल के वरिष्ठ संक्रामक रोग विशेषज्ञ (Infectious Disease Specialist) डॉ. जतिन आहूजा के अनुसार, जैसे ही एंटीबायोटिक से भरपूर चिकन बतौर भोजन आपके शरीर में प्रवेश करता है, वह अपनी तमाम एंटीबायोटिक आपके शरीर को ट्रांसफर कर देता है. समय के साथ, आपके शरीर में चिकन से ट्रांसफर हुई एंटीबायोटिक आपके शरीर में जगह बना लेते हैं. नतीजन, आपके शरीर में समय के साथ एंटीबायोटिक को लेकर रेजिस्टेंस पैदा हो जाती है और एंटीबायोटिक दवाएं आपके शरीर में काम करना बंद कर देती हैं.
डॉ. जतिन आहूजा के अनुसार, एएमआर यानी एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (Antimicrobial resistance). चिकन से आपके शरीर में पहुंचने वाले एंटीबायोटिक कुछ समय के बाद आपको एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस की स्थिति में ले आते हैं. ऐसी स्थिति में आपके शरीर में तरह तरह के इंफेक्शन होना शुरू हो जाते हैं और उनका इलाज बेहद मुश्किल होने लगता है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एएमआर को दुनिया के 10 सबसे बड़े स्वास्थ्य खतरों में एक माना है. डब्ल्यूएचओ का कहना है कि मनुष्यों में संक्रमण रोकने या उसके इलाज करने के लिए एंटीमाइक्रोबियल का इस्तेमाल एंटीबायोटिक्स, एंटीवायरल, एंटीफंगल और एंटीपैरासिटिक्स के तौर पर किया जाता है. लाइव स्टॉक में एंटीबायोटिक के इस्तेमाल से एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस की स्थिति उत्पन्न हो रही है.



