छत्तीसगढ़

5. मोटे अनाज में राजगिरा सबसे लाभकारी, जानिए कौन-कौन से होते हैं गुणकारी तत्व

अंबिकापुर. छत्तीसगढ़ में किसानों को अब पारंपरिक फसलों की बजाय मोटे अनाजों की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। अभी तक लोग मोटे अनाज के रूप में ज्वारए बाजरा, मक्का, रागी, कोदो का नाम ही जानते थे। इन अनाजों से ज्यादा फायदेमंद व पोषक से भरपूर राजगिरा भी है, जिसे बहुत ही कम लोग जानते हैं। इसमें कैल्शियम व आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता है। राजगिरा की खेती अब सरगुजा में शुरू कर दी गई है। सबसे पहले राजमोहिनी देवी कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र अंबिकापुर में ट्रायल किया गया था। इसका प्रयोग सफल होने के बाद इस खेती को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान केन्द्र द्वारा जिले के 100 किसानों के बीच राजगिरा के बीज का वितरण किया गया थाए जो सफल रहा। इसे क्षेत्रीय भाषाओं में राम दाना, अनार दाना, चुआ, राजरा बाथू, मारचू एवं चौलाई के नाम से भी जानते हैं। राजमोहिनी देवी कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र के विज्ञानी जितेन्द्र तिवारी ने बताया कि सबसे पहले कृषि महाविद्यालय में राजगिरा की खेती का ट्रायल किया गया था। इस वर्ष 2 एकड़ भूमि में इसकी खेती की गई थी। इसका उपज लगभग 13 क्विंटल रहा। यह ढाई एकड़ भूमि में 15 से 16 क्विंटल उपज का अनुमान रहता है।
राजगिरा में यह हैं तत्व

विज्ञानी जितेन्द्र तिवारी ने बताया कि राजगिरा कम मेहनत में बेहतर मुनाफा देने वाली फसल है जो कम पानी और विपरीत परिस्थितियों में भी बंपर उत्पादन देती है। राजगिरा के दानों में 12.19 प्रतिशत प्रोटीनए 63 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट्स एवं 5.5 प्रतिशत लाइसिन पाया जाता है। यह आयरनए बीटा केरोटिन और फोलिक एसिड का बहुत अच्छा स्रोत है। राजगिरा का इस्तेमाल आटे से लेकर बेकरी उत्पादों में भी किया जाता है। बालों की समस्या से लेकर कॉलेस्ट्रॉल मजबूत करने में राजगिरा का अहम योगदान है। आयुर्वेद चिकित्सक डॉ एके सिंह ने बताया कि राजगिरा में शरीर के पोषक तत्व भरपूर होता है। इससे बने भोजन को करने से हड्डियों को कमजोर होने से बचा सकते हैं। वहीं इसमें बाकी अनाजों की तुलना में तीन गुना अधिक कैल्शियम होता हैए जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद कर सकता है।

 

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