छत्तीसगढ़

शिकायत के बाद भी चुप्पी — क्या जोन 10 में चल रहा है अंदरखाने खेल?”

“अतिक्रमण पर ‘साइलेंट मोड’ में प्रशासन — जोन 10 की भूमिका संदिग्ध”

एम डी आरिफ़ अमन की रिपोर्ट….

रायपुर। नगर निगम जोन क्रमांक 10 की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल — शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं, भ्रष्टाचार की आशंका गहराई
शहर में अवैध निर्माण, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के मामलों को लेकर एक बार फिर नगर निगम जोन क्रमांक 10 चर्चा के केंद्र में आ गया है। लगातार मिल रही शिकायतों और पत्रकारों द्वारा उठाए गए मुद्दों के बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा किसी भी प्रकार की ठोस कार्रवाई न किया जाना कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

स्थानीय नागरिकों और जागरूक पत्रकारों ने अवैध निर्माण और भ्रष्ट गतिविधियों को लेकर कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें दर्ज करवाई हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इन शिकायतों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। इससे यह संदेह गहराने लगा है कि कहीं न कहीं इस पूरे मामले में मिलीभगत या भ्रष्टाचार की बू आ रही है।
सूत्रों के अनुसार, जिन स्थानों पर नियमों की खुलकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, वहां निरीक्षण तक नहीं किया जा रहा। अगर कभी कार्रवाई की जाती भी है, तो वह सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाती है। इस ढिलाई से न केवल अवैध निर्माण को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि कानून व्यवस्था और शहर की संरचना पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

“शिकायत दी, भरोसा मिला… लेकिन कार्रवाई नहीं — जोन 10 पर बड़ा सवाल”

जोन कमिश्नर को शिकायत पत्र सौंपे जाने के दौरान उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि अतिक्रमण करने वालों को किसी भी प्रकार का संरक्षण नहीं दिया जाएगा और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। लेकिन आश्वासन के 8–10 दिन बीत जाने के बाद भी जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई है। इससे प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं और आमजन में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

पत्रकारों का कहना है कि जब लोकतंत्र का चौथा स्तंभ ही अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए मुद्दे उठा रहा है और फिर भी प्रशासन मौन बना हुआ है, तो यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। आम जनता में भी आक्रोश बढ़ता जा रहा है और लोग अब इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं।

अगले अंक में उन सभी जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम उजागर किए जाएंगे, जिनके पास शिकायतें पहुंचने के बावजूद कार्रवाई में लापरवाही बरती गई। संबंधित मामलों में किस स्तर पर उदासीनता दिखाई गई, इसका भी विस्तार से खुलासा किया जाएगा।

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