छत्तीसगढ़

2. फूलों की खेती से महक रही किसानों की गृहस्थी, दूसरे राज्यों में बिक्री से हो रही बंपर कमाई

महासमुंद . : इस हर साल फूलों की खेती का रकबा भी बढ़ रहा है। फूलों की खेती करने किसान आगे आ रहे हैं . जिले में 1628 हेक्टेयर में फूलों की खेती की गई है। इसमें 14288 मीट्रिक टन फूलों का उत्पादन हुआ है। उद्यानिकी विभाग के अनुसार कम समय में अच्छी आमदनी होने से किसान धान के अलावा सब्जी व फूल की खेती पर भी ध्यान दे रहे हैं। किसान खेतों उत्पादित फूलों को दूसरे जिलों के अलावा अन्य राज्यों में भी निर्यात कर रहे हैं।

फूलों की सप्लाई अन्य राज्यों में होती है

महासमुंद के फूलों की सप्लाई रायपुर, बिलासपुर के अलावा अन्य राज्यों में भी होती है। फूलों की मांग नवरात्रि से दीपावली तक अधिक रहती है। वहीं शादी के सीजन में भी फूलों की अच्छी मांग रहती है। लेकिन वर्तमान में सभी सीजन में फूलों की अच्छी मांग है। महासमुंद से गुलाब, गेंदा, सजावटी फूल जरबेरा की मांग अधिक रहती है। खुले बाजार में जरबेरा फूल की ज्यादा मांग है। इस फूल का डेकोरेशन और पुष्पगुच्छ बनाने में अधिक उपयोग होता है। तुमगांव के किसान अरूण चंद्राकर ने बताया कि वे गुलाब, जरबेरा, सेवंती, गेंदा की खेती करते हैं। इससे उन्हें हर साल 10-12 लाख रुपए आमदनी हो जाती है। पांच पॉली हाउस में उन्होंने फूलों की खेती की है। एक-एक पॉली हाउस में करीब 2-2 लाख रुपए की आमदनी हो जाती है।

हर दो साल में वे एक पॉली हाउस बनाते हैं। पिछले साल ही उन्होंने एक पॉली हाउस बनाया है। उन्होंने बताया कि वे सवा 3 एकड़ में गुलाब, 1 एकड़ में जरबेरा, 80 डिसमिल में सेवंती और आधे एकड़ में गेंदा की खेती कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि सेवंती की खेती सीजनल है। दीपावली से मार्च तक सेवंती की खेती करते हैं। गुलाब, जरबेरा व गेंदा की सालभर खेती करते हैं। डिमांड की हिसाब से फूलों की सप्लाई की जाती है। उन्होंने बताया कि फूलों की सप्लाई रायपुर, बिलासपुर के अलावा ओडिशा के कटक, भुवनेश्वर तक होती है।

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