5. निमोनिया होने पर डाइट में शामिल करें ये 7 चीज़ें, जल्दी होंगे स्वस्थ

आज ‘विश्व निमोनिया दिवस’ है. निमोनिया एक रेस्पिरेटरी डिसऑर्डर है, जो एक या दोनों फेफड़ों में हवा की थैली में इंफ्लेमेशन होने के कारण होता है. इसमें ये वायु थैली तरल पदार्थ या मवाद से भर जाती है, जिससे सांस लेने में समस्या होने के साथ ही बुखार, सीने में दर्द, खांसी, ठंड लगना, थकान, उल्टी, जी मिचलाना जैसे लक्षण नज़र आ सकते हैं. इस फ्लूइड को म्यूकस कहते हैं. यह बैक्टीरिया, फंगी और वायरस के कारण होता है. निमोनिया शिशुओं के साथ बुजुर्गों को अधिक होता है, क्योंकि उनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है. निमोनिया होने पर खानपान का खास ख्याल रखना चाहिए, ताकि लक्षण ट्रिगर ना हों. कुछ फूड्स ऐसे हैं, जिनके सेवन से निमोनिया में राहत मिल सकती है. फेफड़े हेल्दी होते हैं, इम्यूनिटी मजबूत होती है, जिससे इंफेक्शन से लड़ने में मदद मिलती है.
सबसे जरूरी है निमोनिया के लक्षण नजर आने पर डॉक्टर से इलाज कराना और दवाओं को समय पर सेवन करना. साथ ही खानपान में खास ध्यान दें. तरल पदार्थ का सेवन अधिक करें. इसके लिए आप पानी और अन्य लिक्विड आइटम्स का सेवन खूब करें. इससे फेफड़ों में मौजूद म्यूकस ढीले होकर बाहर निकलते हैं. बाहरी पार्टिकल्स से बचाते हैं, जो रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट में जाकर बाधा उत्पन्न करते हैं.
हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन इस दौरान खूब करना चाहिए. इसमें आप पालक, लेट्यूस या सलाद पत्ता, केल आदि का सेवन करें. ये कई तरह के न्यूट्रिएंट्स से भरपूर होती हैं. शरीर को ताकत देती हैं ये पत्तेदार सब्जियां. इनमें एंटीऑक्सीडेंट्स भी होते हैं, जो रेस्पिरेटरी इंफेक्शन को ठीक करते हैं, फंगी, वायरस, बैक्टीरिया को बढ़ने नहीं देते हैं.
निमोनिया के मरीजों को खट्टे फलों का सेवन भी करना चाहिए. चूंकि, सिट्रस फलों में विटामिन सी अधिक होता है, जो इम्यूनिटी को बढ़ाता है. ऐसे में जल्दी ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है. खट्टे फलों में एंटीऑक्सीडेंट्स होने के कारण भी ये बाहरी वायरस, बैक्टीरिया, हानिकारक एजेंट्स से शरीर को सुरक्षित रखते हैं.
घर का बना खाना ही खाएं. साबुत अनाज में क्विनोआ, ओट्स, जौ, ब्राउन राइस आदि खाने से शरीर को एनर्जी मिलती है. इनमें बी-विटामिन होता है, जो शरीर को एनर्जी प्रदान करता है. शरीर के तापमान को नॉर्मल रखने में मदद करता है. साबुत अनाज के सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बूस्ट होती है.
निमोनिया होने पर आप प्रोटीन से भरपूर डाइट का सेवन करेंगे, तो लाभ होगा. इसके लिए आप मछली जैसे सार्डिन्स, सैल्मन, बींस, बीज, नट्स आदि खाएं. इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रॉपर्टीज होती हैं, जो क्षतिग्रस्त हुए टिशूज को दोबारा से शरीर में रिपेयर और निर्माण करने में कारगर होते हैं.
अदरक में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी और जीवाणुरोधी गुण निमोनिया का कारण बनने वाले रोगाणुओं से लड़ने में मदद कर सकते हैं. यह सीने में दर्द को कम करते हैं. सीने में दर्द होना निमोनिया इंफेक्शन का एक लक्षण है. आप अदरक वाली चाय पिएंगे तो फायदा होगा.
शहद में मौजूद हीलिंग प्रॉपर्टीज खांसी-सर्दी को ठीक करने में कारगर होती हैं. खांसी, सर्दी भी निमोनिया के लक्षण होते हैं. शहद में एंटीबैक्टीरियल और एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं, जो निमोनिया के लक्षणों को ट्रिगर होने से रोक सकते हैं.
इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. अमन प्रकाश न्यूज़ इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)



