राष्ट्रीय

बटलर के बल्ले से भारत हुआ बाहर

उत्तेजना में उतावली क्रिकेट प्रेमी जनता मान रही थी की भारत बिना सेमी या फाइनल खेले विश्व विजयी होने वाला है। जैसे जीवन में हर एक का दिन आता है वैसे ही कल का दिन बटलर और हेल्स् के नाम रहा।

एम.डी. आरिफ की रिपोर्ट………

भारत बनाम इंग्लैण्ड

सपने संवरने से ज्यादा टूटते ही हैं। जीवन में, और क्रिकेट खेल में भी आशाएं और आशंकाओं का ऐसा ही खेल चलता है। भारत का आस्ट्रेलियाई सपना समाप्त हुआ। शर्माजी के बेटे के सपने के साथ करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों का आस्ट्रेलियाई बीसमबीस विश्व कप का सपना भी टूट गया। इंग्लैण्ड के बटलर और हेल्स् की धाकड़ बल्लेबाजी के सामने भारत की विजय का सपना चकनाचूर हुआ। इंग्लैण्ड ने एडिलेड मैदान पर एतिहासिक बल्लेबाजी करते हुए भारत को बीसमबीस विश्व कप से बाहर कर दिया। भारत की गेंदबाजी को क्षत-विक्षत कर दिया।

उत्तेजना में उतावली क्रिकेट प्रेमी जनता मान रही थी की भारत बिना सेमी या फाइनल खेले विश्व विजयी होने वाला है। जैसे जीवन में हर एक का दिन आता है वैसे ही कल का दिन बटलर और हेल्स् के नाम रहा। एडिलेड के मैदान पर भारतीय टीम भी बटलर और हेल्स् की बल्लेबाजी की दर्शक बना दी गयी। ऐसा लगा की बटलर और हेल्स् भारतीय गेंदबाजों को नहीं बल्कि नेट-प्रेक्टिस में प्रेक्टिस कराने आए गेंदबाजों की धुलाई कर रहे हैं। लगा ही नहीं की विश्व कप में जीत कर सेमी-फाइनल में पहुंची दो बराबर की टीमें खेल रही हैं।

टॉस इंग्लैण्ड ने जीता और गेंदबाजी चुनी। भारत टॉस जीत कर भी बल्लेबाजी ही करना चाहता था। इंग्लैण्ड ने उनको वही कराया। एडिलेड की पिच को बल्लेबाजी के लिए अच्छा माना जा रहा था। पिच पर घास नाम मात्र भी नहीं थी। माना जा रहा था कि गेंदबाजी को सिर्फ मार ही खाने के लिए आना होगा। भारत की शुरूआत मुश्किल रही क्योंकि के एल राहुल लंबा टिक नहीं सके। डील-डोल से थुलथुल लग रहे रोहित भी ज्यादा नहीं टिक सके, और उंची उठती एक गेंद पर आसान कैच दे बैठे। उसके बाद भारत या तो विकेट बचाता या रन बनाता। विकेट ही बचाने में लगा।

विराट कोहली और हार्दिक पांड्या टिक कर खेले और जरूरी साझेदारी गढ़ी। इन दोनों के ही कारण भारत सेमी-फाइनल में अपने खेल को सम्मान दे सका। आखिर में पांड्या ने शानदार और जबरदस्त शॉट खेले। दोनों के ही कारण भारत सम्मानजनक स्कोर पर पहुंचा। लगा अगर अच्छी गेंदबाजी के ठीक फिल्डिंग करते हैं तो इस स्कोर पर लड़ा जा सकता है। लेकिन बटलर अलग ही पकवान बनाने के मूड में थे। हेल्स् के साथ मिलकर जैसे दोनों में उंचे से उंचा और लंबे से लंबा शॉट खेलने की होड़ लग गयी हो। भारत के गेंदबाजों ने कैसी भी राहत, और फिल्डर्स् को कोई मौका नहीं दिया। गेंदों को मार-मार के भूस निकाल दी। बटलर और हेल्स् ने इंग्लैण्ड के किसी ओर बल्लेबाज को कदम रखने का मौका भी नहीं दिया। भारत की टीम को, और भारतीयों को हताश करने की हद तक हैरान किया। सभी के चेहरे लटक गए, सपने टूट गए।

भारतीय टीम ने लगन से विश्व कप के लिए मेहनत की थी। इसलिए हारने पर हताश होना लाज़मी है। लेकिन मनोरम अनिश्चितताओं के खेल क्रिकेट में निश्चित जीत किसी की नही हो सकती है। खेल देखते रहिए। सपने भी लेते रहिए।

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