8. बच्चों के साथ बड़ों के पेट में भी होते हैं कीड़े, महीनों शरीर में रहते हैं ये इंटेस्टाइनल वर्म… डिवर्मिंग क्यों है जरूरी?

आमतौर पर यह माना जाता है कि पेट के कीड़े केवल बच्चों या अस्वच्छ भोजन खाने वालों की समस्या होते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। भारत जैसे देश में यह संक्रमण केवल भोजन से नहीं बल्कि आसपास के वातावरण से भी फैल सकता है।
डॉ. पूजा खन्ना (सीनियर कंसल्टेंट, जनरल पीडाट्रिक्स, अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद) बताती हैं कि पेट के कीड़े खाने में दिखने वाले कीड़े नहीं होते। इनके अंडे और लार्वा इतने सूक्ष्म होते हैं कि आंखों से दिखाई नहीं देते और मिट्टी, पानी, फल-सब्जियों, सतहों या हाथों के जरिए शरीर में पहुंच जाते हैं। एक बार शरीर में जाने के बाद ये लंबे समय तक बिना लक्षण के रहकर धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाते हैं।
डिवर्मिंग क्यों जरूरी?
पेट के कीड़े शरीर के पोषक तत्वों को सोख लेते हैं। इससे आयरन, विटामिन-बी12 और प्रोटीन की कमी हो सकती है। लंबे समय तक संक्रमण रहने पर एनीमिया, कमजोरी, थकान, कम इम्युनिटी और पाचन संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। कई लोग इन संकेतों को सामान्य थकान या तनाव समझकर अनदेखा कर देते हैं।
केवल घर का खाना पर्याप्त नहीं
विशेषज्ञों का कहना है कि घर का पका भोजन भी असुरक्षित हो सकता है यदि सब्जियां ठीक से न धोई गई हों या पानी साफ न हो। कच्ची और पत्तेदार सब्जियों पर मिट्टी के कण चिपके रह सकते हैं।
इसके अलावा पालतू जानवरों का संपर्क, सार्वजनिक शौचालय का उपयोग, नंगे पैर चलना और हाथों की सफाई में लापरवाही भी संक्रमण के प्रमुख कारण हैं।
संभावित लक्षण
पेट के कीड़ों के लक्षण अक्सर धीरे-धीरे सामने आते हैं, जिनमें शामिल हैं जैसे- पेट फूलना या दर्द, लगातार थकान और कमजोरी, भूख कम लगना, वजन न बढ़ना, एनीमिया, दस्त या कब्ज, एनल इचिंग, बार-बार बीमार पड़ना
साल में कितनी बार डिवर्मिंग करना चाहिए
डॉ. पूजा खन्ना के अनुसार बच्चों में संक्रमण अधिक पाया जाता है, इसलिए जोखिम वाले क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों को साल में दो बार डिवर्मिंग की सलाह दी जाती है।
वयस्कों को बिना जांच के नियमित दवा नहीं लेनी चाहिए। यदि बार-बार पेट की समस्या हो, मिट्टी या पालतू जानवरों का संपर्क अधिक हो या साझा शौचालय का उपयोग करते हों, तो डॉक्टर की सलाह के बाद ही दवा लेनी चाहिए।
दवा की सुरक्षा और सावधानियां
डिवर्मिंग दवाएं सामान्यतः सुरक्षित होती हैं, लेकिन गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली महिलाएं, लिवर रोग या गंभीर एनीमिया से पीड़ित व्यक्ति बिना चिकित्सकीय सलाह दवा न लें। बार-बार स्वयं दवा लेना नुकसानदायक हो सकता है।
बचाव के उपाय
विशेषज्ञों के अनुसार दवा से कीड़े खत्म हो जाते हैं, लेकिन स्वच्छता नहीं रखने पर संक्रमण दोबारा हो सकता है। इसलिए साफ पानी पीना, फल-सब्जियां अच्छी तरह धोना, नियमित हाथ धोना, जूते-चप्पल पहनना और साफ शौचालय का उपयोग आवश्यक है।



