4. वजन घटाने के चक्कर में घी, तेल छोड़ना कर सकता है बीमार

आजकल बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्होंने वजन बढ़ने के डर से-घी तेल को बिल्कुल ही त्याग दिया है। यानी कि फेड डाइट पर रहने लगते हैं। कई युवाओं अथवा अन्य लोगों में पिछले कुछ सालों से फिटनेस के प्रति बदलते नजरिए के कारण उनकी यह सोच बन गई है कि, तेल-घी का सेवन वजन को बढ़ाता ही है। जिससे वह अपने खाने में इनको अवॉइड करने लगे हैं। और उबले हुए खाद्य पदार्थों अथवा फलों का ही सेवन करने लगते हैं। लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो एक शोध के अनुसार आहार में बिल्कुल भी वसा का सेवन न करने से हम स्वयं ही आने वाले समय में अपने स्वास्थ्य को रिस्क में डाल रहे हैं।
पिछले कुछ वर्षों की बात करें तो, किशोरों और युवाओं में सोशल मीडिया पर आने वाली लगभग हर सामग्री काफी प्रभाव डालती है। और इसी कारण वह अपने स्वास्थ्य से संबंधित और वजन कम करने वाली सामग्री को उनके तथ्यों को बिना जाने-समझे आहार में शामिल कर लेते हैं। हो सकता है कि इन तरीकों से उनका वजन ना पड़े लेकिन वह अन्य समस्याओं को न्यौता जरूर देते हैं। तो आइए जानते हैं कि हमारी आहार में पर्याप्त मात्रा में भी तेल के महत्व को…
• अपने आहार में उचित मात्रा में घी-तेल यानी वसा का सेवन ना करके हम अपने मस्तिष्क और नर्वस सिस्टम को जोखिम में डाल देते हैं। जिसके परिणाम स्वरूप दिमाग सही से कार्य नहीं करता यानी हो सकता है कि, कई बार आप बोलना कुछ चाहते हैं और निकल कुछ और जाए। सही वसा शरीर में ना होने से हमारी याददाश्त पर असर पड़ता है, शरीर कमजोर होता है अथवा मूड स्विंग्स हो सकते हैं। इसलिए चिकित्सक भी पर्याप्त मात्रा में वसा और तेलों के सेवन की सलाह देते हैं।
• विशेषज्ञ हमेशा ही हमारे शरीर को अनावश्यक तनाव में डालने वाली फेड डाइट का विरोध करते हैं। कभी-कभी कुछ हार्ट पेशेंट अथवा रक्तचाप से पीड़ित लोग अपने आहार से घी या यहां तक कि स्वस्थ तेल जैसे सरसों या जैतून का तेल पूरी तरह से हटा देते हैं। लेकिन आपको बता दें कि ऐसा करने से वह अपने हृदय के जोखिम को और बढ़ा देते हैं। क्योंकि शरीर को वसा की आवश्यकता होती है। हमारा मस्तिष्क, हमारा तंत्रिका तंत्र, मस्तिष्क, चालन प्रणाली और हमारी नसें सभी वसा पर कार्यरत होते हैं। अगर आपको हटाना ही है तो, अपने आहार में से ट्रांसफैट यानी जंक फूड या स्ट्रीट फूड को अवॉइड कीजिए।
• चिकित्सकों के अनुसार एक अन्य तथ्य यह है कि, वसा में कुछ घुलनशील विटामिन जैसे विटामिन ए, डी, के और ई आदि होते हैं, जो मेटाबॉलिज्म वृद्धि के लिए बहुत जरूरी हैं। अगर आप पर्याप्त मात्रा में इन्हें नहीं लेते हैं तो, आपको स्वास्थ्य संबंधी कई परेशानियां हो सकती हैं। इन विटामिन की कमी से हमारे शरीर की चयापचय क्रियाएं सुस्त पड़ सकती हैं। जिसके परिणाम स्वरूप सोचने-समझने की शक्ति में कमी, ब्लीडिंग, स्लो मेंटेशन अथवा लिंब्स में कमजोरी जैसी अन्य परेशानियां शुरू होने लगती हैं।



