छत्तीसगढ़

3. बस्तर में लाखों रुपए की नशीली दवाओं के साथ 5 आरोपी गिरफ्तार, इलाकों में बढ़ती जा रही इन दवाओं की मांग

छत्तीसगढ़ के बस्तर जिला मुख्यालय जगदलपुर में बस्तर पुलिस ने नशीली दवाओं के अवैध कारोबार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए बड़ी मात्रा में नशीली दवा जब्त कर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जब्त नशीली दवाओं में 1,100 नग मोनोकॉप सीरप जिसकी कुल मात्रा 1,10 लीटर है और 12,000 नग पीवोन स्पाज कैप्सूल बरामद किया गया है। इन नशीली दवाओं की अनुमानित कीमत 4 लाख 57 हजार रुपए आंकी गई है।

इसके साथ ही एक ऑटो, एक स्कूटी, 02 मोटरसाइकिल और बीस हजार रुपए नगद भी जब्त किया गया है। मामले में तक्षक माने , सम्यक नाहटा ,हरिस सोनी ,विवेक शर्मा और रितेश सिंह को गिरफ्तार कर एनडीपीएस एक्ट के तहत जेल भेज दिया गया है। जगदलपुर नगर पुलिस अधीक्षक हेमसागर सिदार ने बताया कि शहर में लंबे समय से नशीली दवाओं का व्यापार कुछ युवाओं के द्वारा किया जा रहा था इसमें शहर के कुछ संभ्रांत परिवार के युवा भी शामिल थे।

इस मामले पर बस्तर पुलिस ने पूरी तैयारी की जिसमे शहर के तीन निरीक्षक धनंजय सिन्हा , लालजी सिन्हा और एमन साहू के साथ लगभग सत्रह लोगों की टीम बनाई गई थी। मुखबिर की पुख्ता सूचना के आधार पर कोरियर सर्विस पर नजर बनाई गई थी। पुलिस के अनुसार इन दवाओं को ओडिशा, बिहार और गुजरात जैसे अलग अलग राज्यों से कोरियर के माध्यम से मंगाया जाता था।

शहर में ड्रग्स कोकीन की तरह होती है बिक्री
बस्तर में इन दिनों नशीली दवाओं का व्यापार जमकर चल रहा है। नशे के कारोबार का आलम यह है कि बड़े शहरों की तर्ज पर जगदलपुर में भी ड्रग्स-कोकीन की तर्ज पर नशीली दवाओं की बिक्री चल रही है। शहर के युवा बड़ी संख्या में इसके गिरफ्त में आ चुके हैं। जानकारों के अनुसार शराब से कम कीमत में ये दवाइयां उपलब्ध हो जाती हैं और इसका नशा भी देर तक रहता है जिस वजह से युवा इससे जल्द आकर्षित हो जाते हैं। एक बार यदि किसी को इसकी लत लग जाती है तो वह किसी भी कीमत में इसे खरीदता है , इसी वजह से इसके व्यापार से जुड़े लोगों को दुगुना मुनाफा होता है। नगर पुलिस अधीक्षक हेमसागर सिदार के अनुसार अभी भी कई नशे के सौदागर पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं और जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार करने का दवा किया जा रहा है।

लाइसेंसी दुकाने इस कारोबार से पूरी तरह मुक्त होने का दावा
शहर में बड़ी मात्रा में नशीली दवाओं की खेप को जब्त किये जाने के बाद जब ड्रग कंट्रोलर हेमंत श्रीवास्तव से इसकी वजह पूछा गया तो उन्होंने बताया कि शहर में जितनी भी लाइसेंसी दुकाने हैं वहां इस तरह की प्रतिबंधित दवाएं नहीं बेचीं जाती हैं। विभाग के द्वारा समय समय पर इसकी जाँच भी की जाती है पर इस तरह के अवैध दवाओं पर पुलिस की मदद से कार्यवाही की जाती है।

इन दवाओं के सप्लाई पर किस तरह रोक लगाने के प्रयास किये जा रहे हैं के सवाल पर अधिकारी ने कहा कि ऐसे मामलों में बिल और जानकारी गलत होती हैं जिससे केवल स्थानीय स्तर पर विक्रेता पर कार्यवाही की जाती है। इस कार्यवाही को उन्होंने पुलिस के साथ संयुक्त कार्यवाही होना बताया है।

 

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