अध्यक्ष चुनाव करा कर कांग्रेस मैसेज दे सकती है?
तभी कहा जा रहा है कि उन्होंने शशि थरूर को चुनाव लड़ने के लिए हरी झंडी दी। यह भी संभव है कि शशि थरूर को पार्टी आलाकमान की ओर से ही लड़ने को कहा गया हो।

- एम. डी. आरिफ की कलम से
रायपुर।
कांग्रेस पार्टी के नए अध्यक्ष के लिए इस बार चुनाव होने की पूरी संभावना है। अगर चुनाव होता है और नेहरू-गांधी परिवार से बाहर के नेताओं के बीच मुकाबला होता है तो देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस इसके जरिए आंतरिक लोकतंत्र का मैसेज बनवा सकती है। यह फालतू की बात है कि चुनाव होगा तो पार्टी टूट जाएगी या किसी साजिश के तहत शशि थरूर को चुनाव लड़ाया जा रहा है। पार्टी टूटनी होगी तो वैसे भी टूट जाएगी। राज्यों में तो पार्टी टूट ही रही है। बड़े नेता छोड़ कर जा ही रहे हैं तो इस चिंता में चुनाव नहीं कराना या अध्यक्ष पद के लिए आम सहमति की बात करना सही नहीं है।
ऐसा लग रहा है कि सोनिया गांधी इस बार चुनाव करा कर वंशवाद के आरोपों से कुछ हद तक मुक्ति की मन बना चुकी हैं।
तभी कहा जा रहा है कि उन्होंने शशि थरूर को चुनाव लड़ने के लिए हरी झंडी दी। यह भी संभव है कि शशि थरूर को पार्टी आलाकमान की ओर से ही लड़ने को कहा गया हो। बिना चुनाव के अपनी पसंद के और परिवार के प्रति निष्ठावान किसी नेता को अध्यक्ष बना देने से वह मैसेज नहीं बनता, जो दो नेताओं के बीच चुनाव से बनेगा। सबको पता है कि अगर अशोक गहलोत चुनाव लड़ते हैं और परिवार की ओर से उनको समर्थन मिलता है तो वे बड़े अंतर से जीतेंगे। इसके बावजूद चुनाव होने से उनकी वैधता बनेगी और उनकी नैतिक सत्ता मंजूर होगी। कोई यह नहीं कहेगा कि वे रबर स्टैंप हैं। सो, अगर शशि थरूर पार्टी में परिवार विरोधी नेताओं की शह पर लड़ रहे हैं तब भी अच्छी बात है और अगर कांग्रेस के नए अध्यक्ष के चुनाव को वैधता दिलाने के लिए नूराकुश्ती करने उतर रहे हैं तब भी अच्छी बात है। अध्यक्ष थोपने की बजाय चुनाव कराना हमेशा बेहतर विकल्प होता है।



