छत्तीसगढ़

6. बदलते मौसम और प्रदूषण से बढ़ा गले-नाक का इंफेक्शन:गरारे करें, ठंडी चीजों से परहेज करें, हल्दी वाला दूध पिएं, विटामिन सी लें

खांसी, गले में खराश, सांस लेने में दिक्कत, दर्द और बुखार है तो आप मौमस में बदलाव और बढ़ते प्रदूषण का निशाना बन चुके हैं। बदलते मौसम की वजह से लगातार मरीजों की संख्या बढ़ गई है। सुबह और शाम के समय पॉल्यूशन और दिन-रात के टेम्प्रेचर में फर्क की वजह से ज्यादा लोगों में ये लक्षण दिखाई दे रहे हैं। मौसम बदलने और पॉल्यूशन के कारण आप भी गले की समस्या से परेशान हैं, तो पूर्व चिकित्सा प्रभारी यूनानी डॉ सुबासा राय के ये टिप्स अपनाएं।

बदलते मौसम में खुद का रखें ख्याल

मौसम के बदलने से और पॉल्यूशन बढ़ने की वजह से लोगों को अक्सर गले की परेशानी होने लगती है। इससे लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है, क्योंकि गला शरीर के सेंसिटिव हिस्से में से एक है। गले में हल्का भी कुछ होता है तो उसकी वजह से शरीर के बाकी अंग भी प्रभावित होते हैं। गला खराब होने पर बुखार तक आ जाता है। जैसे ही पॉल्यूशन बढ़ता है तो ये सारी परेशानी होना शुरू होती है, जिसकी वजह से लोगों को सांस लेने में दिक्कत शुरू हो जाती है। ऐसे में गले की देखभाल करने के लिए इन आसान तरीकों को जरूर अपनाएं।

रोज गर्म पानी से गरारे करें

गर्म पानी के गरारे करने से गले की खराश, दर्द जैसी समस्या से राहत मिलती है। गले के इन्फेक्शन को दूर करने के लिए गरारे काफी फायदेमंद हैं। इससे गले में इंफेक्शन की वजह से हो रही सूजन भी कम हो जाती है, साथ ही मुंह से सारे बैक्टीरिया भी मर जाते हैं।

हल्दी वाला दूध पिएं

हल्दी की तासीर गर्म होती है जो गले के लिए फायदेमंद है। हल्दी में एंटीसेप्टिक गुण होते हैं और दूध में कैल्शियम की अच्छी मात्रा पाई जाती है। इन दोनों को एक साथ लेने से इसके फायदे और बढ़ जाते हैं। हल्दी वाला दूध शरीर से बैक्टीरिया दूर करता है। वहीं पॉल्यूशन के कारण गले मे होने वाले दर्द से भी राहत दिलाता है हल्दी वाला दूध।

ठंडी चीजों से परहेज करें

जब भी गले में कोई परेशानी होती है तो सबसे पहले ठंडी चीजों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। इससे गले में परेशानी बढ़ सकती है। जितना हो सके गर्म चीजों का ही इस्तेमाल करें और ध्यान रहे, अगर आपको गले में समस्या ज्यादा हो रही है तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं, क्योंकि गले में छोटी लगने वाली दिक्कत बड़ी परेशानी भी हो सकती है।

विटामिन सी का सेवन करें

शरीर में एक के बाद एक परेशानी होने लग जाए तो समझ लेना चाहिए कि आपका इम्यून सिस्टम सही से काम नहीं कर रहा। ऐसे में बीमारियों से लड़ने और बचाने के लिए विटामिन सी लेना चाहिए। विटामिन सी किसी भी रूप में ले सकते हैं फल, सब्जी, लेमन टी, आंवला या दवा के जरिए।

स्टीम लें

खांसी, जुकाम या गले में दर्द महसूस हो तो गर्म पानी का भाप जरूर लें, क्योंकि भाप लेने से गले, नाक में होने वाले इन्फेक्शन से राहत मिलती है। गले की समस्या से बचना चाहते हैं तो कुछ चीजों का परहेज करें, जिससे आपको गले में होने वाले दर्द को न झेलना पड़े।

आयुर्वेद के ये उपाय अपनाएं

आयुर्वेद के मुताबिक डाइजेशन सिस्टम को ठीक करने के लिए शरीर में त्रिदोष- वात, पित्त और कफ कम होंगे, आव नहीं बनेगा, डाइजेशन सिस्टम सही रहेगा और खांसी-जुकाम, सांस लेने में दिक्कत नहीं होगी।

  • गाय के शुद्ध घी की एक-एक बूंद नाक में डालें।
  • इससे सांस की नली साफ हो जाती है, सांस लेने में दिक्कत नहीं होती।
  • हानिकारक तत्व फेफड़ों तक नहीं पहुंचते।
  • रात के समय दही, छाछ, मूली, उड़द की दाल लेने से बचें।
  • चाय में तुलसी, अदरक, लौंग, काली मिर्च डालना लाभदायक।
  • मूंग की दाल, हरी सब्जी, मसूर और चने की दाल ले सकते हैं।
  • पिसी काली मिर्च को शहद के साथ लेने से सीने में जमा कफ दूर होता है।

इन बीमारियों के बढ़ रहे रोगी

प्रदूषण बढ़ने के बाद सांस, अस्थमा, हार्ट अटैक, हाइपरटेंशन दमा समेत तमाम बीमारियों के रोगी बढ़ रहे हैं। लोगों को घर से बाहर निकलते वक्त ध्यान रखना चाहिए कि चेहरा ढका हो। प्रदूषण बढ़ने से बीमारियां बढ़ रही हैं।

सावधानी बरतें

  • सुबह और शाम को ठंड ज्यादा है तो बाहर निकलने से बचें, क्योंकि प्रदूषण ज्यादा होता है
  • रात को ठंड अधिक होती है और दिन में गर्मी। ऐसे में रात को पूरे-मोटे कपड़े पहनें
  • लक्षण दिखें तो तरल पदार्थ की मात्रा बढ़ा दें
  • डेंगू होने का संदेह हो तो डॉक्टर से परामर्श जरूर लें
  • खराश या गले, कान आंख में संक्रमण के लक्षण बढ़ते हैं तो डॉक्टर की सलाह से एंटी एलर्जिक दवा ले सकते हैं
  • गर्म पानी से भाप लेने से भी ये लक्षण दूर हो सकते हैं
  • तापमान में अचानक बदलाव से दमा के मरीजों को ज्यादा दिक्कत हो सकती हैं, ऐसे में वे सतर्क रहें
बदलते मौसम और हवा में घुलते जहर से इम्यूनिटी कमजोर होती है।

दूषित हवा इम्यूनिटी कम करती है

सुबह और शाम ठंड बढ़ती है तो पीएम 2.5 और इससे छोटे माइक्रोन के आकार के प्रदूषण कण जमीन की सतह के आसपास ही रहते हैं। ये कण इतने छोटे होते हैं कि सांस नली के जरिए खून में घुल जाते हैं। इससे इम्यूनिटी कमजोर होती है और दमा के मरीजों को सांस लेने में दिक्कत और अन्य लोगों को गले में खराश होती है। साथ ही बुखार भी हो सकता है।

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