राष्ट्रीय

72 घंटे की भू समाधि से बाहर आए बाबा पुरुषोत्तमानंद, अनुयायियों को दिया सात्‍विक जीवन जीने का संदेश

भद्रकाली विजयासन दरबार नामक आध्यात्मिक संस्था के संस्थापक बाबा पुरुषोत्तमानंद महाराज ने शुक्रवार को ली थी भूमिगत समाधि। बाबा के सेवादारों के मुताबिक जनकल्‍याण की कामना से बाबा ने ली समाधि। साधु-संतों की मौजूदगी में आज सुबह 11 बजे भू समाधि से बाहर आए बाबा।

भोपाल-  राजधानी में टीटी नगर माता मंदिर के पीछे भद्रकाली विजयासन दरबार के आध्यात्मिक संस्था के संस्थापक बाबा पुरुषोत्तमानंद महाराज तीन दिन के बाद आज सुबह 11 बजे भू समाधि से बाहर आ गए। गुफा मंदिर के महंत रामप्रवेश दास महाराज व पुतलीघर के महंत अनिलानंद महाराज की मौजूदगी में बाबा भू समाधि से बाहर आए। आश्रम के सेवादारों ने जैसे ही समाधि की जगह से मिट्टी की परत हटाने के बाद एक-एक कर पटियों को हटाया, तो बाबा गड्ढे में शांत भाव से ध्‍यान मुद्रा में बैठेे नजर आए। यह देखते ही भक्‍तों में खुशी की लहर दौड़ गई। बाबा अपनी जगह से धीरे-धीरे उठे, भगवान को प्रणाम किया व दोेनों हाथ उठाकर सबका अभिवादन किया। भक्‍तोंं ने पुष्‍पवर्षा कर बाबा के समाधि से बाहर आने पर उनका अभिनंदन किया।

बाबा जैसे ही समाधि से बाहर आए, वहां मौजूद लोगों में उनकी झलक पाने की होड़ लग गई। तमाम लोग अपने मोबाइल में बाबा की तस्‍वीरें लेते, वीडियो बनाते नजर आए।

समाधि से बाहर आकर बाबा पुरुषोत्‍तमानंद ने अपने अनुयायियों को सात्‍विक जीवन जीने का संदेश दिया और कहा कि लोग दुराचार से दूर रहें। मांस-मदिरा का सेवन न करें। इसी से जीवन का कल्‍याण होगा।

समाधि का अनुभव सुनाया

बाबा पुरुषोत्‍तमानंद ने तीन दिन की भू समाधि का अपना अनुभव भी सुनाया। बाबा बोले कि जमीन के भीतर समाधिस्‍थ होने बाद मुझे मातारानी का साक्षात्‍कार हुआ। मातारानी मेरे समक्ष प्रकट हुईं और मुझे स्वर्गलोक ले गई। इतना सुंदर सरोवर था। वहां कई प्रकार के पक्षियों को देखा। माताजी शिवलोक ले गईं। वहां ओम-ओम की ध्वनि चल रही थी।

इससे पहले भद्रकाली विजयासन दरबार में आज सुबह से ही दरबार में भक्‍तों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। सुबह नौ बजे से दरबार में पूजा-अर्चना व हवन कार्यक्रम शुरू हो गए। भक्‍त आश्रम परिसर में बैठकर भजन-कीर्तन कर रहे हैं।

गौरतलब है कि बाबा पुरुषोत्तमानंद महाराज ने विगत शुक्रवार को सुबह दस बजे भू समाधि ले ली थी। बाबा की भू समाधि के दौरान दरबार में 10 से 15 भक्तों की मौजूदगी निरंतर बनी रही। समाधि के पास निरंतर धार्मिक अनुष्ठान चल रहे हैं। इससे पहले मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन भी किया गया था।

भद्रकाली विजयासन दरबार के सेवक व बाबा पुरुषोत्तमानंद के बेटे मित्रेश कुमार सोनी ने बताया कि बाबा ने जनकल्याण के लिए 72 घंटे की भूमिगत समाधि ली थी। बीते 30 सालों से बाबा संत का जीवन जी रहे हैं।

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